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    Home » बस्ती के औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखने का समय

    बस्ती के औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखने का समय

    P.K. RastogiBy P.K. RastogiJuly 18, 2026
    Vijaydoot News

    •डी डी पांडेय

    विचार मंथन। पूर्वांचल का महत्वपूर्ण जनपद बस्ती अपनी समृद्ध कृषि परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभाशाली मानव संसाधन के लिए जाना जाता है। लेकिन यदि औद्योगिक विकास की बात करें तो यह जिला आज भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। बढ़ती जनसंख्या, सीमित रोजगार के अवसर और युवाओं का लगातार पलायन इस बात का संकेत है कि अब केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देनी होगी।

    एक समय बस्ती और वाल्टरगंज की चीनी मिलें इस क्षेत्र की आर्थिक धुरी थीं। इन मिलों ने न केवल हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया, बल्कि स्थानीय व्यापार, परिवहन और छोटे-छोटे उद्योगों को भी जीवंत बनाए रखा। इन मिलों के बंद होने से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई और पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ कमजोर पड़ गईं।

    बाद में मुंडेरवा चीनी मिल के पुनः संचालित होने से उम्मीद की एक किरण अवश्य दिखाई दी और वर्तमान में रुधौली चीनी मिल भी अपनी भूमिका निभा रही है। लेकिन यह भी सच है कि आज की विशाल आबादी और रोजगार की बढ़ती मांग के सामने केवल चीनी उद्योग पर्याप्त नहीं हैं। बस्ती को खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, वस्त्र उद्योग, औषधि निर्माण, कृषि आधारित उद्योग, एमएसएमई, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य आधुनिक औद्योगिक इकाइयों की आवश्यकता है।

    यह भी समझना होगा कि कोई भी उद्योग केवल एक फैक्ट्री नहीं होता। उसके साथ हजारों परिवारों की रोजी-रोटी, स्थानीय बाजारों की रौनक, परिवहन, होटल, छोटे दुकानदार, सेवा क्षेत्र और अनेक सहायक व्यवसाय जुड़े होते हैं। जब कोई उद्योग स्थापित होता है तो विकास की एक पूरी श्रृंखला प्रारंभ होती है, और जब कोई उद्योग बंद होता है तो उसका असर दूर-दूर तक दिखाई देता है।

    निश्चित रूप से विकास की कीमत पर्यावरण नहीं हो सकता। प्रत्येक उद्योग को पर्यावरणीय मानकों, प्रदूषण नियंत्रण के नियमों और स्थानीय लोगों के हितों का पूर्ण सम्मान करना चाहिए। लेकिन केवल विरोध के लिए विरोध करना भी किसी क्षेत्र के भविष्य के हित में नहीं है। संवाद, पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

    आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, जनप्रतिनिधि, उद्योग जगत और स्थानीय समाज मिलकर बस्ती को एक नए औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित करने का संकल्प लें। बेहतर सड़क और रेल संपर्क, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे तथा पूर्वांचल के विकसित होते बुनियादी ढाँचे का लाभ उठाकर बस्ती निवेश का आकर्षक केंद्र बन सकती है।

    यदि बस्ती में बड़े और मध्यम उद्योग स्थापित होते हैं तो इसका सबसे बड़ा लाभ स्थानीय युवाओं को मिलेगा। उन्हें रोजगार के लिए महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा और जिले की आर्थिक तस्वीर भी बदलेगी।
    समय की मांग स्पष्ट है बस्ती के औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखने का। बस्ती को केवल रोजगार खोजने वाला जिला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला जिला बनाना होगा। औद्योगिक विकास ही इस परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम बन सकता है।

    (लेखक स्वतंत्र स्तंभकार हैं, जानकार बस्ती के विकास एवं उन्नति के लिए मुखर रहते हैं एवं विभिन्न फ़ोरम पर समय समय पर अपने विचार रखते हैं)

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    पवन कुमार रस्तोगी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में न्यूज़ पोर्टल में एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने एम.ए., बीएड, पत्रकारिता तथा एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर क्षेत्र में एडीसीए तथा कला के क्षेत्र में बॉम्बे आर्ट जैसे पाठ्यक्रम भी पूर्ण किए हैं। समाचार लेखन, संपादन, जनसरोकार से जुड़े विषयों और डिजिटल पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। वे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को सरल, सटीक और विश्वसनीय ढंग से पाठकों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

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