रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख (सीतापुर)। मिश्रिख तहसील स्थित उपनिबंधक कार्यालय में बैनामे के नाम पर कथित दलाली और निजी मुंशियों की सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कार्यालय में निजी मुंशियों की मौजूदगी के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामले में रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात रजिस्टर बाबू सुषमा यादव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ निजी मुंशियों के माध्यम से कथित तौर पर लेनदेन किया जाता है और कमीशन निर्धारित होने की चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जाता है कि जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान तहसीलों में कार्यरत निजी मुंशियों को हटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कथित रूप से निजी मुंशियों की सक्रियता बनी हुई है। इससे प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कहती रही है। ऐसे में उपनिबंधक कार्यालय में लगाए जा रहे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराना जरूरी है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन शिकायतों का संज्ञान लेकर जांच कराता है या नहीं और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।


