नई दिल्ली। देश में डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने भारत की पहली डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा (Qdenga) को मंजूरी दे दी है। जापान की टाकेडा फार्मास्युटिकल कंपनी द्वारा विकसित इस वैक्सीन से डेंगू संक्रमण और उसके गंभीर प्रभावों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने के साथ ही डेंगू के मामलों में तेजी आती है। विश्व स्तर पर दर्ज होने वाले डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई भारत में सामने आता है। वर्ष 2025 में देश में 1.13 लाख से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए गए थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी क्यूडेंगा वैक्सीन की सिफारिश कर चुका है। यह वैक्सीन वर्ष 2022 में वैश्विक स्तर पर लॉन्च की गई थी और वर्तमान में 43 देशों में इसका उपयोग किया जा रहा है। अब तक दुनिया भर में लगभग 3.2 करोड़ लोगों को यह वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
चिकित्सकों के अनुसार, क्यूडेंगा वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को डेंगू वायरस की पहचान करने और उसके खिलाफ एंटीबॉडी विकसित करने में मदद करती है। इससे संक्रमण होने की संभावना के साथ-साथ गंभीर डेंगू, अस्पताल में भर्ती होने और जटिलताओं का जोखिम भी काफी हद तक कम हो सकता है। हालांकि, वैक्सीन की प्रभावशीलता व्यक्ति की आयु और स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि डेंगू का समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। गंभीर मामलों में डेंगू हेमोरेजिक फीवर, डेंगू शॉक सिंड्रोम, प्लेटलेट्स में तेज गिरावट, आंतरिक रक्तस्राव, प्लाज्मा लीकेज तथा मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में वैक्सीन के साथ-साथ मच्छरों से बचाव और समय पर चिकित्सा परामर्श भी अत्यंत आवश्यक है।