•फसल और मकान क्षति का तत्काल सर्वे कर पात्र लोगों को मिले मुआवजा, पूर्ण क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ने के निर्देश
चित्रकूट/लखनऊ। अतिवृष्टि से प्रभावित जनपद चित्रकूट का भ्रमण कर लौटने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और फसल तथा मकानों को हुई क्षति का तत्काल सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि जिन लोगों को नुकसान हुआ है, उन्हें सरकारी सहायता का लाभ समय से मिले।
पूर्ण क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को मिलेगा आवास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उनके पुनर्वास की व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर की जाए।
वहीं, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए पात्र परिवारों को नियमानुसार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि क्षति के आकलन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और वास्तविक प्रभावित परिवार किसी भी स्थिति में सहायता से वंचित न रहें।
प्रभावित व्यापारियों और मठ-मंदिरों को भी सहायता
चित्रकूट धाम में बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित व्यापारियों तथा मठ-मंदिरों को हुए नुकसान का भी आकलन कराने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का सर्वे कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने राहत सामग्री के वितरण में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत किट का वितरण 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए। राहत कार्यों की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर से की जाए, ताकि प्रभावित लोगों तक समय से आवश्यक सामग्री पहुंच सके।
स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता पर विशेष जोर
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई, पेयजल की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार निगरानी की जाए, ताकि जलजनित बीमारियों और संक्रमण को रोका जा सके।
मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया से हटेगा अतिक्रमण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पवित्र मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कैचमेंट एरिया में किए गए अतिक्रमण का चिन्हांकन कर नियमानुसार हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही मंदाकिनी नदी पर बने फुट ओवर ब्रिज का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए, ताकि संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को समाप्त किया जा सके।
मंदाकिनी में नहीं गिरेगा सीवर और नालों का पानी
मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी की स्वच्छता को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पवित्र मंदाकिनी नदी में किसी भी दशा में सीवर और नालों का गंदा पानी नहीं जाना चाहिए।
इसके लिए पर्यटन, सिंचाई और नगर विकास विभाग को आपसी समन्वय से एक समेकित कार्ययोजना तैयार कर उसे प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी के घाटों के विस्तारीकरण की कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया, ताकि धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों के साथ नदी क्षेत्र का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
भविष्य में बाढ़ से नुकसान कम करने की बने दीर्घकालिक योजना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों के साथ-साथ भविष्य में अतिवृष्टि और बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि आपदा के बाद राहत पहुंचाना जरूरी है, लेकिन भविष्य में ऐसी परिस्थितियों में नुकसान कम से कम हो, इसके लिए स्थायी और प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए। जल निकासी, नदी क्षेत्र, कैचमेंट एरिया और बाढ़ संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कर आवश्यक कार्ययोजना तैयार की जाए।
पशुधन की सुरक्षा और गोशालाओं में चारे की व्यवस्था के निर्देश
मुख्यमंत्री ने बाढ़ के दौरान पशुधन की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था की जाए तथा गोशालाओं में पर्याप्त मात्रा में चारे और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा पशुओं को लंपी डिजीज से बचाने के लिए भी आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। पशुधन के स्वास्थ्य की निगरानी, आवश्यक उपचार और बचाव के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चित्रकूट में अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार तक प्रशासन की सहायता पहुंचे। राहत, क्षति आकलन, मुआवजा, आवास, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता सहित सभी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक और स्थायी समाधान पर तेजी से काम किया जाए।


