•वर्ष 2020 में लिया था संकल्प, तब से अन्न और खड़ाऊं का किया त्याग; जल, तुलसी पत्र और नींबू जल का कर रहे सेवन
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी जी महाराज पिछले पांच वर्षों से अन्न का त्याग कर तपस्या कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2020 में संकल्प लिया था कि जब तक श्रीकृष्ण जन्मभूमि को उसके मूल स्वरूप में मुक्त नहीं कराया जाता, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और खड़ाऊं भी नहीं पहनेंगे।
बताया गया कि संकल्प के बाद से दिनेश फलाहारी जी महाराज नियमित रूप से जप, ध्यान और शास्त्र पाठ में समय व्यतीत कर रहे हैं। उनके अनुसार, वे भोजन के स्थान पर जल, तुलसी पत्र और नींबू जल का सेवन करते हैं।
महाराज का कहना है कि उनका संकल्प श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति से जुड़ा हुआ है और जब तक उनका संकल्प पूरा नहीं होता, तब तक वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। वे अपनी तपस्या को इसी संकल्प के अनुरूप निरंतर जारी रखने की बात कहते हैं।
उनके इस संकल्प और तपस्या को लेकर स्थानीय लोगों तथा संत समाज के बीच चर्चा बनी हुई है। दिनेश फलाहारी जी महाराज का कहना है कि “जब तक जन्मभूमि मुक्त नहीं होती, तब तक न अन्न ग्रहण करूंगा और न ही खड़ाऊं पहनूंगा—यही मेरा संकल्प है।”
श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। ऐसे में महाराज की तपस्या उनके व्यक्तिगत धार्मिक संकल्प के रूप में जारी है।

