प्रयागराज। अन्याय के सामने झुकना या अपने सम्मान के लिए आवाज उठाना ध्रुवस्वामिनी ने अपने संघर्ष से इसका जवाब दिया। शनिवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में जयशंकर प्रसाद की कालजयी रचना ‘ध्रुवस्वामिनी’ के मंचन ने नारी स्वाभिमान, अधिकार और स्वतंत्रता के सवालों को जीवंत कर दिया। प्रियंका शर्मा के निर्देशन में कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों का मन मोह लिया।
भारतेन्दु नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और जिला प्रशासन, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में वीर नायकों पर आधारित नाट्य मंचन श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को मुख्य अतिथि महापौर श्री उमेश चंद्र गणेश केशरवानी और केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा , उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
गुप्तकालीन पृष्ठभूमि पर आधारित इस नाटक में सत्ता, सामाजिक मर्यादा और स्त्री के अधिकारों के बीच संघर्ष को दर्शाया गया। ध्रुवस्वामिनी अन्याय के सामने झुकने के बजाय अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्र निर्णय के लिए आवाज उठाती है। मंच-सज्जा और प्रतीकों के माध्यम से ‘जर, जोरू और जमीन’ जैसी पुरानी मानसिकता पर सवाल उठाए गए। प्रस्तुति ने संदेश दिया कि स्त्री किसी की संपत्ति नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और निर्णयों के साथ एक स्वतंत्र व्यक्तित्व है।
ध्रुवस्वामिनी की भूमिका में प्रियंका शर्मा, रामगुप्त के रूप में सुशील शर्मा और चंद्रगुप्त की भूमिका में सुधीर रिखारी ने अभिनय किया। शिखरस्वामी की भूमिका राज तंवर, पुरोहित की भूमिका अंकित सत्ती, शकराज की भूमिका गिरीश बदलानी, कोमा की भूमिका पल्लवी वाई सिंह, मंदाकिनी की भूमिका कनिष्का झा और मिहिरदेव की भूमिका देव ने निभाई। किन्नर की भूमिका में पृथ्वी वर्मा ने शानदार अभिनय कर दर्शकों की सराहना बटोरी। संगीत अंकित सत्ती और हुर्रमत का रहा, जबकि प्रकाश संचालन राहुल सेन ने किया।
कार्यक्रम के दौरान कारगिल युद्ध के विजेताओं, कारगिल के शहीदों की वीर नारियों तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर भारतेन्दु नाट्य अकादमी के सहायक निदेशक डॉ. सुमित श्रीवास्तव, रंगमंडल के सहायक निदेशक श्री प्रिवेन्द्र सिंह, अभिलाष नारायण, प्रदीप भटनागर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।


