सीएचसी के निकट संचालित सेंटरों की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर उठ रही निगाहें, प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार।
रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख (सीतापुर)। मिश्रिख क्षेत्र में संचालित कुछ अल्ट्रासाउंड सेंटरों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जांच के नाम पर मरीजों से मनमानी रकम वसूली जा रही है। वहीं, दलालों की कथित सक्रियता के कारण मरीजों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जांच कराने के लिए आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक रूप से परेशान किया जाता है। जिन परिवारों के लिए एक से दो हजार रुपये जुटाना भी मुश्किल होता है, उन्हें जांच के नाम पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में संबंधित सेंटरों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग उठ रही है।
बताया जा रहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट भी एक अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और जांच व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी सेंटर पर निर्धारित दरों से अधिक वसूली, नियमों के उल्लंघन या दलालों की संलिप्तता की शिकायत है, तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता तथा अनियमितताओं पर कार्रवाई की बात कहते रहे हैं। ऐसे में मिश्रिख क्षेत्र में सामने आ रहे इन आरोपों के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग से प्रभावी निगरानी और जांच की अपेक्षा की जा रही है।
अब सवाल यह है कि संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से इन शिकायतों की जांच के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटरों के अभिलेखों, निर्धारित जांच शुल्क, पंजीकरण तथा अन्य आवश्यक मानकों की जांच करानी चाहिए। जांच में अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई से मरीजों के हितों की रक्षा हो सकेगी।


