रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
सीतापुर। जिले के शाहपुर दलावल गांव में एक दलित परिवार की बाउंड्रीवाल गिराए जाने के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश सरकार के कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही ने सदर एसडीएम जनार्दन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राज्यमंत्री सुरेश राही के अनुसार, वर्ष 1996 में तत्कालीन एसडीएम द्वारा गाटा संख्या 41 की भूमि पर सात किसानों को आवासीय पट्टे आवंटित किए गए थे। इसी भूमि पर वर्षों से कई परिवार निवास कर रहे हैं। इनमें राधेश्याम नामक व्यक्ति भी शामिल हैं, जिन्होंने करीब 30 वर्ष पूर्व अपने मकान के चारों ओर बाउंड्री बनवाई थी।
आरोप है कि राधेश्याम द्वारा बाउंड्री की ऊंचाई बढ़ाने और छप्पर डालने का कार्य किए जाने के दौरान 2 जून को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी से दीवार गिरा दी गई। मंत्री का कहना है कि यदि भूमि पर वैध कब्जा था और संबंधित लोगों के पास पट्टे के दस्तावेज मौजूद हैं, तो बिना नोटिस कार्रवाई किया जाना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
राज्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिस भूमि को पूर्व में कब्जामुक्त कराकर दलित परिवारों को आवंटित किया गया था, उसी पर की गई कार्रवाई संदिग्ध प्रतीत होती है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मामले को लेकर प्रभावित परिवार के लोग अपनी शिकायत लेकर जिले के प्रभारी मंत्री मनोज पांडेय से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान मंत्री पक्ष और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक की भी चर्चा रही। घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने प्रकरण की जांच कराए जाने की बात कही है। वहीं सदर एसडीएम जनार्दन का कहना है कि कार्रवाई जिलाधिकारी के निर्देश पर तथा नियमानुसार की गई है।
फिलहाल मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई थी या नहीं। पूरे घटनाक्रम पर जिले की जनता और राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।