– आखिर कब तक अपनी जिम्मेदारियों से भागेंगे विनोद अग्रवाल: पंडित यतेंद्र मुकद्दम
-इस्तीफे की चर्चाओं में सच्चाई है तो भाजपा के जनप्रतिनिधि इस्तीफा सार्वजनिक कर जनता के सामने रखें।
मथुरा-वृंदावन महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पंडित यतेंद्र मुकद्दम ने मथुरा-वृंदावन नगर निगम के महापौर विनोद अग्रवाल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पिछले लगभग तीन महीने से महापौर का नगर निगम की जिम्मेदारियों और जनसमस्याओं से दूर रहना बेहद चिंताजनक है। आज नगर निगम की महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक में भी महापौर की अनुपस्थिति उनकी कार्यशैली और अपने पद के प्रति जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
पंडित यतेंद्र मुकद्दम ने कहा कि मथुरा-वृंदावन की जनता आज सड़कों की बदहाली, जलभराव, सफाई व्यवस्था, पेयजल संकट, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में जब जनता को अपने महापौर की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब महापौर का लगातार सार्वजनिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से दूर रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। नगर निगम जैसी महत्वपूर्ण संस्था को नेतृत्वविहीन स्थिति में छोड़ना जनता के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा सामने आ रही है कि महापौर विनोद अग्रवाल ने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप दिया है। यदि इन चर्चाओं में सच्चाई है और महापौर ने वास्तव में इस्तीफा दिया है तो भाजपा के सभी जनप्रतिनिधियों एवं भाजपा के जिला और महानगर नेतृत्व को तत्काल उस इस्तीफे को सार्वजनिक कर जनता के सामने रखना चाहिए। आखिर जनता को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है? इस्तीफा दिया है तो उसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए और यदि नहीं दिया है तो महापौर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
पंडित मुकद्दम ने सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधि जनता को जवाब दें कि मथुरा-वृंदावन नगर निगम की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है? जनता की समस्याओं का समाधान कौन करेगा? आखिर महापौर पिछले तीन महीने से अपनी जिम्मेदारियों से दूरी क्यों बनाए हुए हैं?
उन्होंने कहा कि महापौर का पद केवल सत्ता और सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और सेवा का दायित्व है। यदि कोई व्यक्ति इस जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम नहीं है तो उसे पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
पंडित यतेंद्र मुकद्दम ने मां यमुना की दुर्दशा पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मथुरा की धार्मिक आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं मां यमुना से जुड़ी हुई हैं, लेकिन महापौर की उदासीनता के चलते यमुना की स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। शहर के नालों का गंदा पानी लगातार यमुना जी में प्रवाहित हो रहा है। यमुना के घाटों पर भी व्यवस्थाएं बदहाल हैं। श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। मां यमुना की पवित्रता और मथुरा की धार्मिक पहचान के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर नगर निगम प्रशासन और महापौर की चुप्पी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने दो टूक कहा कि जब महापौर जनता की समस्याओं, नगर निगम की महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक और मां यमुना की दुर्दशा तक के प्रति जवाबदेह नहीं हैं, तो फिर उन्हें महापौर की कुर्सी पर बने रहने का नैतिक अधिकार क्या है? मथुरा की जनता अब बहाने नहीं, जवाब चाहती है। भाजपा के जनप्रतिनिधियों को जनता को गुमराह करना बंद कर महापौर की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। महानगर कांग्रेस कमेटी इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी और मथुरा-वृंदावन की जनता की आवाज बुलंद करती रहेगी।


