पूर्वोत्तर रेलवे की सीएमटी प्रयोगशाला को चार वर्ष की एनएबीएल मान्यता।

Spread the love

गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर की रासायनिक एवं धातुकर्म परीक्षण (सीएमटी) प्रयोगशाला को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) द्वारा चार वर्ष की मान्यता प्रदान की गई है। हाल ही में आईआरआईएस प्रमाणन प्राप्त करने के बाद यह उपलब्धि गुणवत्ता आश्वासन और वैज्ञानिक परीक्षण क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगी।

महाप्रबंधक उदय बोरवणकर के मार्गदर्शन में पूर्वोत्तर रेलवे में संरक्षा, गुणवत्ता, विश्वसनीयता और तकनीकी उन्नयन को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में सीएमटी प्रयोगशाला को कार्बन स्टील, लो-अलॉय स्टील और स्टेनलेस स्टील की रासायनिक, यांत्रिक एवं धातुकर्मीय जांच सहित कुल 61 परीक्षण मानकों के लिए एनएबीएल मान्यता प्राप्त हुई है। इसके अलावा रबर उत्पादों तथा धुरों एवं पहियों के गैर-विनाशकारी परीक्षण की भी मान्यता दी गई है।

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में यांत्रिक कारखाना में सीएमटी परीक्षण, सामग्री व्यवहार, विश्वसनीयता और विफलता विश्लेषण विषय पर तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और कर्मचारियों को आधुनिक परीक्षण प्रक्रियाओं तथा गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी गई।

महाप्रबंधक उदय बोरवणकर ने कहा कि वैज्ञानिक परीक्षण व्यवस्था रेल कोचों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण कड़ी है। एनएबीएल मान्यता से प्रयोगशाला की परीक्षण प्रणाली को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वसनीयता प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि इससे यात्रियों की सुरक्षा और रेल सेवाओं की गुणवत्ता को और मजबूती मिलेगी।

प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर नरेश कुमार ने कहा कि आधुनिक रेल कोच अनुरक्षण में परीक्षण प्रयोगशालाएं सुरक्षा, विश्वसनीयता और विफलता रोकथाम का आधार हैं। वहीं मुख्य कारखाना प्रबंधक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि गुणवत्ता केवल अंतिम निरीक्षण से नहीं, बल्कि सामग्री चयन, परीक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण की मजबूत प्रणाली से सुनिश्चित होती है।

उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (प्लांट) एच.आर. खान ने इस उपलब्धि को यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर की गुणवत्ता यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह भारतीय रेल की सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की दिशा में एक अहम उपलब्धि है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *