• बच्चों के लिए जीवन रक्षक घोल है ओआरएस: डा. मनोज कुमार सिंह
•डायरिया से बचाव में ओआरएस का घोल अत्यंत प्रभावी: ए.एम.एस
मथुरा। विश्व ओआरएस सप्ताह को लेकर केएम अस्पताल के बाल रोग विभाग द्वारा एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बाल रोग विशेषज्ञों ने डिहाइड्रेशन और डायरिया (दस्त) के रोकथाम एवं ओआरएस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को महत्वपूर्ण टिप्स दिए।


यह कार्यक्रम अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नमित गौतम के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसका शुभारंभ केएम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति किशन चौधरी ने किया तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार सिंह ने की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. नमित गौतम ने बताया कि डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से होने वाली मौतों को रोकने और लोगों में ओआरएस के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से वर्ष 2001 से ‘विश्व ओआरएस दिवस’ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मौतों का एक प्रमुख कारण डायरिया है, जिससे बचाव में ओआरएस का घोल अत्यंत प्रभावी है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष सीनियर प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप महालानबीस को फादर ऑफ ओआरएस कहा जाता है। वर्ष 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय शरणार्थी शिविरों में फैले हैजा व डायरिया के दौरान ओआरएस ने हजारों लोगों की जान बचाई थी।
उन्होंने ओआरएस घोल बनाने और पिलाने की सही विधि बताते हुए कहा बच्चे को ओआरएस घोल छोटे-छोटे घूंटों में उसकी इच्छा अनुसार देना चाहिए। यदि कमर्शियल ओआरएस उपलब्ध न हो, तो आपातकाल में 1 लीटर साफ पानी में 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाकर घरेलू ओआरएस बनाया जा सकता है। ओआरएस को जीवन रक्षक घोल भी बोला जाता है।
डॉ. अर्चिता जैन ने बना हुआ ओआरएस घोल को 24 घंटे के भीतर ही इस्तेमाल कर लेने की सलाह देते हुए ओआरएस घोल बनाकर दिखाया। कार्यक्रम के दौरान एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें डायरिया से बचाव, व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने के सही तरीकों और ओआरएस के उपयोग को दर्शाया गया। केएम मेडिकल कॉलेज के दो दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं ने आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से जन-जागरूकता का संदेश प्रस्तुत किया, जिसका मूल्यांकन विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
कार्यशाला में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ सिंह ताल्यान, एसोसिएट प्रोफेसर डा. अनुपम अग्रवाल, सीनियर रेंजीडेट डॉ. अपूर्वी सक्सेना, डॉ. अर्चिता, डॉ. अक्षय, डॉ. मरीनल, डॉ. मोनिका, डॉ. सोनल, डॉ. अंकिता सिंह, डॉ. निखिल, डॉ. सचिन, डॉ. प्रतीक, डॉ. मनदीप, डॉ. अपूर्व, डॉ. प्रिंस सहित दर्जनों एमबीबीएस छात्र-छात्राएं, पीजी-यूजी डॉक्टर्स, मार्केटिंग पीआरओ और आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।