•डुवासु में एफएओ के भारत प्रतिनिधि ने दिया व्याख्यान, सतत पशुधन विकास पर रखे विचार।
रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासु) में सोमवार को एफएओ (संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन) के भारत प्रतिनिधि श्री ताकायुकी हागीवारा ने अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संवाद एवं आमंत्रित व्याख्यान में कहा कि भारत सतत कृषि, खाद्य प्रणालियों और पशुधन विकास के क्षेत्र में विश्व का प्रमुख प्रेरक बनने की क्षमता रखता है।



उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा और नवाचार की क्षमता उसे वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाती है।
कुलपति डॉ. अभिजित मित्र के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “भारतीय परिप्रेक्ष्य में पशुधन क्षेत्र का भविष्य : एफएओ का दृष्टिकोण” था। व्याख्यान में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, इंटर्न तथा अन्य हितधारकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
अपने संबोधन में श्री हागीवारा ने कहा कि पशुधन क्षेत्र खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और सतत कृषि विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि भविष्य में पशुधन उत्पादन को वैज्ञानिक निर्णय प्रणाली, जलवायु-अनुकूल उत्पादन तकनीकों, नवाचार तथा विश्वविद्यालयों, सरकारों, उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारी के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने वैश्विक पशुधन विकास, आधुनिक तकनीकों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका श्री हागीवारा ने विस्तार से उत्तर दिया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर कुलपति, डॉ. अभिजित मित्र ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय अकादमिक कार्यक्रम विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं तथा विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देते हैं। उन्होंने डुवासु पधारने और एफएओ के वैश्विक अनुभव साझा करने के लिए श्री हागीवारा का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में अतिथि का धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा आयोजन समिति और संकाय सदस्यों के प्रयासों की सराहना की गई। इस आयोजन ने पशुचिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग के क्षेत्र में डुवासु की बढ़ती पहचान को और मजबूत किया।