अवैध खनन पर सख्ती, ब्लास्टिंग सुरक्षा और वृक्षारोपण के निर्देश; डीएम ने अधिकारियों व पट्टाधारकों संग की समीक्षा बैठक।

Vijaydoot News


•खनन के बाद भूमि पुनर्स्थापन, मलबा निस्तारण और प्रति एकड़ 200 वृक्ष लगाने के निर्देश; सुरक्षा मानकों के पालन पर दिया जोर।

मीरजापुर। जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभागार में उपखनिजों के अवैध खनन एवं परिवहन, खनन क्षेत्रों में ब्लास्टिंग के सुरक्षा मानकों तथा खनन के उपरांत वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) एवं प्रभारी अधिकारी (खनिज) विनोद कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी चुनार, मड़िहान व लालगंज, उप निदेशक खान सुरक्षा निदेशालय वाराणसी, खान अधिकारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी तथा जनपद के खनन पट्टाधारक उपस्थित रहे।

बैठक में जिलाधिकारी ने बालू, मोरम, गिट्टी और बोल्डर के अवैध खनन, परिवहन एवं ओवरलोडिंग पर नियमित अभियान चलाकर उत्तर प्रदेश उपखनिज परिहार नियमावली-2021 तथा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम-1957 के तहत प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी पट्टाधारक स्वीकृत खनन क्षेत्र से उपखनिज का परिवहन केवल ई-एमएम-11 के माध्यम से तथा भंडारणकर्ता ई-फॉर्म-सी के माध्यम से ही करें।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि खनन पट्टा क्षेत्र में ब्लास्टिंग का कार्य सक्षम विभाग की अनुमति प्राप्त कर प्रबंधक, फोरमैन अथवा अधिकृत ब्लास्टर की निगरानी में ही कराया जाए। उन्होंने 45 डिग्री कोण पर वैज्ञानिक ढंग से खनन करने, मानकों के अनुरूप बेंच बनाने तथा ढीले पत्थरों को किनारों पर एकत्रित न करने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।

उन्होंने कहा कि विस्फोटक सामग्री का भंडारण एवं उपयोग खान सुरक्षा निदेशालय के मानकों के अनुरूप किया जाए। साथ ही श्रमिकों को हेलमेट, सुरक्षा जूते, डस्ट मास्क सहित सभी आवश्यक पीपीई किट उपलब्ध कराई जाएं। श्रमिकों के लिए नवीनतम सुरक्षा तकनीकों का प्रशिक्षण, ग्रुप वीटीसी की स्थापना तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के सहयोग से नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने पर भी जोर दिया गया।

पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि खनन कार्य के दौरान क्षेत्र में मौजूद वृक्षों को सुरक्षित रखा जाए तथा किसी भी स्थिति में उनका अनावश्यक कटान न हो। उन्होंने सभी पट्टाधारकों को अपने निजी संसाधनों से स्थानीय प्रजातियों के फलदार एवं छायादार वृक्ष लगाने, उनकी सिंचाई और फेंसिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एक एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले प्रत्येक खनन पट्टे में प्रति एकड़ कम से कम 200 वृक्ष लगाने होंगे।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संरक्षण के दृष्टिकोण से खनन के उपरांत भूमि का पुनर्स्थापन, मलबे का वैज्ञानिक निस्तारण तथा व्यापक वृक्षारोपण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।