•पितृ पक्ष में तर्पण, श्राद्ध और श्रीमद्भागवत मूल पाठ को बताया निवारण का उपाय।
रिपोर्ट: विजय नागपाल।
कैसे जानें कि आपकी जन्म कुंडली में पितृ दोष है?
ज्योतिषाचार्य पंडित शुभम अग्निहोत्री के अनुसार जन्म कुंडली में पितृ दोष होने पर व्यक्ति को जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। परिवार में कलह, धन का संचय न हो पाना, आपसी विवाद, लक्ष्य प्राप्ति में बाधा, घर में सुख-शांति एवं समृद्धि की कमी जैसी समस्याएं इसके प्रभाव के रूप में बताई जाती हैं। इसके अलावा विवाह में देरी, विवाह के बाद संतान प्राप्ति में विलंब जैसी समस्याओं का भी उल्लेख ज्योतिष में किया गया है।
क्यों लगता है पितृ दोष?
पंडित शुभम अग्निहोत्री के अनुसार पितृ दोष के कई ज्योतिषीय एवं धार्मिक कारण बताए जाते हैं। इनमें पूर्वजों, माता-पिता अथवा वृद्धजनों का अपमान करना, उनकी सेवा न करना, मृत्यु के बाद विधि-विधान से पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण न करना आदि शामिल हैं। धार्मिक मान्यताओं में पूर्व जन्म में किसी जीव की हत्या को भी इसका एक कारण माना गया है।
पितृ दोष निवारण के लिए क्या करें?
पितृ दोष के निवारण के लिए पितरों का विधि-विधान से तर्पण और श्राद्ध करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही पितृ पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष में श्रीमद्भागवत जी का मूल पाठ कराने को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया है।
पंडित शुभम अग्निहोत्री के अनुसार आग में जलने, पानी में डूबने, विष अथवा जहरीले जीव के काटने, फांसी, दुर्घटना या किसी आपदा में हुई अकाल मृत्यु को लेकर धार्मिक मान्यताओं में विशेष कर्मकांड का उल्लेख मिलता है। ऐसी मृत्यु के मामलों में दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए परिवार द्वारा धार्मिक अनुष्ठान एवं तर्पण आदि किए जाने की परंपरा है।
उन्होंने कहा कि यदि परिवार में किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हुई है तो पितृ पक्ष या कृष्ण पक्ष में उनकी आत्मिक शांति एवं मोक्ष की कामना से श्रीमद्भागवत का मूल पाठ कराया जा सकता है।
पितृ पक्ष में सामूहिक आयोजन
पितरों की शांति एवं सद्गति के उद्देश्य से पितृ पक्ष में ग्वालियर में एक सामूहिक धार्मिक आयोजन प्रस्तावित है। पंडित शुभम अग्निहोत्री ने श्रद्धालुओं से इस आयोजन में सम्मिलित होकर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने का आग्रह किया है।


