रिपोर्ट: संजय त्रिपाठी।
सिद्धार्थनगर। जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जीएन की अध्यक्षता में फसल अवषेश/पराली जलाने से मिट्टी, जलवायु एवं मानव स्वास्थ्य को होने वाले हानि से अवगत कराते हुए फसल अवषेश जलाये जाने की घटनाओं को शून्य रखने के दृ्ष्टिगत कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक सम्पन्न हुई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जीएन द्वारा निर्देशित किया गया है कि फसल कटाई के दौरान प्रयोग की जाने वाली कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बेलर अथवा अन्य कोई फसल अवषेश प्रबन्धन का कृषि यंत्र का उपयोग किया जाना अनिवार्य होगा। यह भी सुनिश्चित किया जाये कि उक्त व्यवस्था के बगैर जनपद मे कोई भी कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई न करने पाये। जनपद मे चलने वाली प्रत्येक कम्बाइन हार्वेस्टर कम्बाइन हार्वेस्टर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा रेक एवं बेलर के बिना चलती हुई पाई जाती है तो तत्काल सीज की कार्यवाही की जायेगी व कम्बाइन मालिक के स्वयं के व्यय पर ही सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम लगवाने के उपरान्त ही छोडा जाय। कृषकों को यह भी अवगत कराया जाये कि मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के अनुसार फसल अवषेश जलाना एक दण्डनीय अपराध है।
पर्यावरण वन और जलवायु परिर्वतन मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा 02 एकड़ से कम भूमि वाले कृषक, प्रति घटना रू0 5000.00 तथा 02 से अधिक 05 एकड़ से कम भूमि वाले कृषक, प्रति घटना रू0 10000.00 एवं 05 एकड से अधिक भूमि वाले कृषक प्रति घटना रू030000.00 पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली के निर्देश है।
कृषकों से अपील है कि फसल कटाई उपरान्त खेत में पराली को जलाये नही जनपद में क्रियाशील कस्टम हायरिंग सेन्टर के माध्यम से फसल अवषेश को एकत्रीत करके जैविक खाद बनाये या सी0बी0जी0 प्लान्ट धुरियापार, गोरखपुर को बेचकर अतिरिक्त आय कर सकते है।
बैठक में उप कृषि निदेशक राजेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पाण्डेय, सी0बी0जी0 प्लान्ट प्रतिनिधि, कम्बाइन धारक, ग्राम प्रधान आदि उपस्थित रहे।


