बरसाना (मथुरा)। ब्रज के प्रसिद्ध विरक्त संत, पद्मश्री से सम्मानित पूज्य रमेश बाबा जी महाराज (90 वर्ष) का 6 अक्टूबर को देहावसान हो गया। 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे गहवर वन, बरसाना में हजारों भक्तों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पूरे ब्रजमंडल में शोक की लहर है।

उनकी अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए अवागढ़ राजघराने के वरिष्ठ नेता कुंवर नरेंद्र सिंह जी बरसाना स्थित मान मंदिर पहुंचे। उन्होंने संत के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
*कुंवर नरेंद्र सिंह जी ने कहा -*
“जो ये पौराणिक धरोहर, ब्रह्मांचल पर्वत और गहवर वन आज सुरक्षित है, वो केवल रमेश बाबा जी महाराज की देन है। अगर बाबा यहां एक योद्धा बनकर नहीं लड़ते, तो आज ब्रज का ये स्वरूप नहीं बचता।”
“बरसाना में बाबा के रूप में कोई साधारण संत नहीं, साक्षात भगवान बैठे थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन गौसेवा, ब्रज के पर्वतों, प्राचीन कुंडों और यमुना जी के संरक्षण तथा ब्रजवासियों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उनका जाना ब्रज के लिए अपूरणीय क्षति है।”
*रमेश बाबा जी के बारे में -*
रमेश बाबा जी का जन्म 1938 में प्रयागराज में हुआ था। वर्ष 1953-54 में वे ब्रज आए और बरसाना में मान मंदिर की स्थापना की। उन्होंने एशिया की सबसे बड़ी माताजी गौशाला की स्थापना की, जहां 60 हजार से अधिक गौवंश की सेवा होती है। ब्रज के पहाड़ों पर अवैध खनन के खिलाफ उन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 2019 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
अंतिम विदाई के अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महंत, ब्रजवासी और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।


