राया (मथुरा)। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में नवाचार और आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा का स्तर लगातार नई ऊँचाइयों को छू रहा है। इसी क्रम में विकासखंड राया के उच्च प्राथमिक विद्यालय शेरनी में एक अद्वितीय और प्रेरणादायी शैक्षिक प्रयोग की शुरुआत हुई है। विद्यालय में ‘ब्रज बालन की बुलेटिन’ नामक एक मासिक न्यूज़ चैनल का शुभारंभ किया गया है, जिसकी टैगलाइन है—“कक्षा से कैमरे तक”। इस बुलेटिन की खासियत यह है कि इसमें प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चे स्वयं न्यूज़ एंकर, रिपोर्टर और वाचक की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
अध्यापक करनपाल सिंह की पहल और विद्यालय परिवार का साझा प्रयास
विद्यालय स्तर पर इस नवाचारी गतिविधि की रूपरेखा तैयार कर इसका नियमित संचालन शिक्षक करनपाल सिंह द्वारा किया जा रहा है। शिक्षक करनपाल सिंह बच्चों को आधुनिक डिजिटल टूल्स, कैमरा फेसिंग, वॉइस मॉड्यूलेशन और समाचार प्रस्तुति के गुर सिखाकर उन्हें मंच प्रदान कर रहे हैं। इस पूरे प्रयास में विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं समस्त शिक्षक व स्टाफ का भरपूर सहयोग मिल रहा है। पूरे विद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण परिवेश के बच्चे तकनीकी और रचनात्मक रूप से सशक्त बन रहे हैं।
एनईपी 2020 और निपुण भारत मिशन से सीधा जुड़ाव
यह गतिविधि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की उस मूल भावना को साकार करती है, जिसमें रटने की प्रवृत्ति से इतर अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) और 21वीं सदी के कौशलों—विशेषकर प्रभावी संचार (Communication Skills), आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) और आत्मविश्वास—के विकास पर जोर दिया गया है। वहीं ‘निपुण भारत मिशन’ के भाषा अधिगम लक्ष्यों के अनुरूप, यह मंच बच्चों के शब्द भंडार, स्पष्ट उच्चारण, धाराप्रवाह अभिव्यक्ति और वाचन क्षमता को प्राकृतिक रूप से समृद्ध कर रहा है।
कैमरे के सामने टूटी झिझक, विकसित हुआ बहुआयामी कौशल
समाचार बुलेटिन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया से जुड़कर बच्चे केवल कैमरे के सामने बोलना ही नहीं सीख रहे, बल्कि विद्यालय व आसपास की सकारात्मक घटनाओं को एकत्र करना, स्क्रिप्ट तैयार करना और टीम के साथ मिलकर कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं। कैमरे के सामने आत्मविश्वास से लबरेज होकर समाचार पढ़ते ग्रामीण बच्चों की यह प्रस्तुति देखते ही बनती है।
विद्यालय का यह अनूठा और अनुकरणीय प्रयास यह साबित करता है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो परिषदीय विद्यालयों के बच्चे भी किसी भी मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।


