मथुरा। जर्जर हो चुके कांशीराम आवासीय कालोनी के फ्लैट खाली कराने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही स्थानीय निवासियों ने विरोध शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि आवास खाली कराने से पहले प्रशासन मूल आवंटियों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करे। इसके बाद ही फ्लैट खाली कराने की कार्रवाई की जाए।
तत्कालीन मायावती सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल कांशीराम आवासीय योजना के फ्लैट्स वर्तमान में जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। स्थानीय लोगों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आवास खाली करने के लिए नोटिस जारी किए थे।
नोटिस की समय-सीमा समाप्त होने के बाद नगर निगम प्रशासन ने अब फ्लैट्स खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में चिंता के साथ आक्रोश भी दिखाई देने लगा। सोमवार को नगर निगम के निर्माण विभाग के कर्मचारियों के कालोनी पहुंचने से पहले ही बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और उन्होंने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया।
स्थानीय निवासी तरुण किशोर, राजा उस्मानी और अकबर समेत अन्य लोगों का कहना है कि कालोनी में मूल आवंटियों के अलावा कई लोग बिना आवंटन के रह रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके आवास खाली कराए और उन आवासों में मूल आवंटियों को स्थानांतरित करे। उनका कहना है कि यदि ऐसा संभव नहीं है तो पूर्व में जमा किए गए दस्तावेजों और आवंटन के आधार पर मूल लाभार्थियों को आवास उपलब्ध कराया जाए।
इस संबंध में नगर निगम के अपर आयुक्त नीरज शर्मा ने बताया कि कांशीराम आवासीय योजना में रहने वाले लोगों को आवास खाली करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस की निर्धारित अवधि पूरी हो चुकी है। अब नियमानुसार उन्हें हटाने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को पहले ही शिफ्ट कराया जा चुका है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।


