•10 किलोग्राम के कम्पोजिट सिलेंडर को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
बस्ती। घरेलू रसोई गैस को लेकर केन्द्र सरकार की नई व्यवस्था पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के श्रम प्रकोष्ठ की प्रदेश महासचिव एवं महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष मंजू पाण्डेय ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 10 किलोग्राम के कम्पोजिट घरेलू एलपीजी सिलेंडर की व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की आशंका है। उन्होंने सरकार से घरेलू उपभोक्ताओं को 14.2 किलोग्राम वाला सिलेंडर पारदर्शी व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने की मांग की।
प्रेस को जारी बयान में कांग्रेस नेत्री ने कहा कि घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी के बीच लंबे समय से स्पष्ट अंतर रहा है। ऐसे में 10 किलोग्राम के कम्पोजिट सिलेंडर को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराए जाने से उसकी कीमत, क्षमता और वास्तविक लाभ को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। यदि कम मात्रा वाली गैस के लिए उपभोक्ता को तुलनात्मक रूप से अधिक कीमत चुकानी पड़ती है तो इसका सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि रसोई गैस आम परिवारों की दैनिक जरूरत है। इसलिए किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उपभोक्ताओं को सिलेंडर की क्षमता, कीमत, सुरक्षा, रिफिल दर, सब्सिडी की पात्रता तथा 14.2 किलोग्राम वाले पारंपरिक घरेलू सिलेंडर से इसके अंतर की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल की उपलब्ध जानकारी के अनुसार घरेलू उपयोग के लिए 14.2 किलोग्राम सिलेंडर प्रमुख श्रेणी में है, जबकि 10 किलोग्राम का कम्पोजिट सिलेंडर घरेलू गैर-सब्सिडी श्रेणी में उपलब्ध कराया जा रहा है।
मंजू पाण्डेय ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पहले से ही रसोई गैस की कीमतों ने आम परिवारों का बजट प्रभावित किया है। ऐसे में कम वजन वाले सिलेंडर की व्यवस्था से यदि प्रति किलोग्राम गैस की लागत बढ़ती है तो सरकार को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सरकार यह बताए कि नए घरेलू कनेक्शन पर 10 किलोग्राम का सिलेंडर किस आधार पर उपलब्ध कराया जा रहा है, इसकी कुल लागत कितनी है और प्रति किलोग्राम एलपीजी की कीमत कितनी पड़ती है। साथ ही उपभोक्ताओं को 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर का विकल्प उपलब्ध है या नहीं, इसकी भी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि विकल्प के नाम पर उपभोक्ताओं को ऐसी व्यवस्था स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनकी रसोई का खर्च बढ़े। उन्होंने केन्द्र सरकार से नई एलपीजी व्यवस्था की उपभोक्ता हित में समीक्षा कराने, विभिन्न सिलेंडरों की कीमत एवं क्षमता का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक करने तथा किसी भी प्रकार की अनिवार्यता या अस्पष्टता को दूर करने की मांग की।


