श्रीराम कथा के पांचवें दिन सुनाया गया महाराज दशरथ की मृत्यु और भरत के चरित्र का प्रसंग।
रिपोर्ट: संजय त्रिपाठी।
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र के सेमरहना में चल रही सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुए महाराज दशरथ की मृत्यु, अयोध्या की शोकाकुल स्थिति और भरत के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मरते समय उन्हीं लोगों की जुबान पर भगवान का नाम आता है, जो जीवनभर भगवान के नाम का संकीर्तन करते हैं।
संत विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि जब अनजाने में किए गए पाप का फल इतना दुखदायी होता है कि धर्मधुरंधर, गुणनिधान और ज्ञानी महाराज दशरथ को भी तड़पना पड़ता है, तो जानबूझकर पाप करने वालों की अंत समय में क्या दशा होती होगी।
कथा का प्रसंग आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के वन गमन के बाद अयोध्या में शोक छा गया। चित्रकूट में श्रीराम के निवास करने के दौरान जब सचिव सुमंत्र सूना रथ लेकर अयोध्या लौटे, तो पूरी नगरी शोक में डूब गई। पुत्र वियोग में राजा दशरथ विलाप करने लगे और श्रीराम को पुकारते-पुकारते मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े।
होश आने पर महाराज दशरथ को अपने सामने श्रवण कुमार के वृद्ध माता-पिता दिखाई दिए। उन्हें श्रवण कुमार के वध की घटना याद आ गई। उन्होंने माता कौशल्या को पूरी घटना सुनाई कि किस प्रकार अनजाने में उनसे श्रवण कुमार का वध हो गया था। इस घटना को याद करते हुए महाराज दशरथ अत्यंत व्यथित हुए।
संत प्रवर ने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि राजा दशरथ ने अपने मरण को सुधार लिया। जीवित रहते हुए उन्होंने श्रीराम के चंद्रमुख का दर्शन किया और अंत समय में राम का नाम लेते हुए शरीर त्याग दिया।
विपत्ति में साथ देने वाला ही सुबंधु
बंधु और सुबंधु के अंतर को स्पष्ट करते हुए विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि जो संपत्ति में साथ देता है, वह बंधु होता है, लेकिन जो विपत्ति में साथ देता है, वह सुबंधु होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने और भगवान के नाम का निरंतर स्मरण करने का संदेश दिया।
कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती इंद्रावती सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शीतल सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि उपेंद्र प्रताप सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंहावलोकन, राहुल सिंह सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


