– पंचवटी शिव मंदिर परिसर में लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया था प्याऊ।
– जनसूचना में कार्यादेश न होने का खुलासा, उठे सवाल।
मगहर/संत कबीर नगर। संत कबीर की महापरिनिर्वाण स्थली के निकट आमी नदी तट पर स्थित प्राचीन पंचवटी शिव मंदिर परिसर में नगर पंचायत द्वारा लगभग चार वर्ष पूर्व निर्मित कराया गया। पेयजल प्याऊ आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। टंकी और टोटी के अभाव में यह प्याऊ केवल शोपीस बनकर रह गया है, जबकि मंदिर और घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों तथा राहगीरों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, तीर्थस्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगर पंचायत ने पूर्व कार्यकाल में घाट पर दो टोटी वाले प्याऊ का निर्माण कराया था। योजना के तहत यहां पानी की टंकी लगाकर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी व्यवस्था पूरी नहीं हो सकी।
गर्मी के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। मंदिर परिसर तथा घाट पर आने वाले लोगों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद प्याऊ का लाभ किसी को नहीं मिल रहा है।
कस्बा निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुर्रहमान उर्फ विक्की खान ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराते हुए अधूरी पड़ी पेयजल व्यवस्था को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना टंकी और टोटी के प्याऊ का निर्माण सरकारी धन की बर्बादी प्रतीत होता है और संबंधित विभाग को इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
कबीर निर्वाण स्थली, कबीर चौरा परिसर तथा पंचवटी शिव मंदिर में वैशाख और ज्येष्ठ माह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के बीच पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था न होने से लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। परिसर में मौजूद इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी भी पीने योग्य नहीं बताया जा रहा है।
जनसूचना में सामने आया नया तथ्य
मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब सामाजिक कार्यकर्ता विक्की खान ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत नगर पंचायत से जानकारी मांगी। नगर पंचायत कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना में बताया गया कि आमी नदी स्थित शिव मंदिर घाट पर प्याऊ निर्माण के लिए कोई कार्यादेश जारी नहीं किया गया था। साथ ही यह भी कहा गया कि यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रतिदिन एक स्टील टैंकर के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि प्याऊ निर्माण के लिए कोई कार्यादेश जारी नहीं हुआ था, तो उसका निर्माण किसने कराया और किस मद से भुगतान किया गया। यह मामला अब जांच का विषय बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा अधूरी पड़ी पेयजल व्यवस्था को शीघ्र चालू कराने की मांग की है, ताकि श्रद्धालुओं और राहगीरों को राहत मिल सके।
