सुलतानपुर। जिले के प्रधान डाकघर समेत बस स्टैंड, सिविल लाइन, करौंदिया व अन्य उपडाकघरों में बुधवार सुबह से नेट और सर्वर फेल होने के कारण करोड़ों रुपये का लेन-देन पूरी तरह ठप्प रहा। घंटों इंतजार के बाद लोग मायूस होकर लौटते नजर आए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले पर मौन साधे रहे।
आलम यह रहा कि पासबुक अपडेट, पैसा जमा-निकासी, स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री समेत तमाम सेवाएं बंद पड़ी रहीं। डिजिटल इंडिया के दावों के बीच डाकघरों की व्यवस्था खुद नेटवर्क तलाशती दिखाई दी। विडंबना यह है कि जिन उपडाकघरों को आम जनता की सुविधा का केंद्र माना जाता है, वहां वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। न पीने के पानी की व्यवस्था, न बैठने की सुविधा। बिजली चली जाए तो पूरा सिस्टम ऐसे ठप्प हो जाता है मानो इमारत नहीं, किसी पुराने जमाने का बंद पड़ा गोदाम हो। न जनरेटर, न इन्वर्टर, यहां तक कि मोमबत्ती और लालटेन तक की व्यवस्था नहीं।
किवंदंतियों में जरूर कहा जाता है कि भारत की डाक व्यवस्था एशिया का सबसे बड़ा जनसंपर्क नेटवर्क है, लेकिन जमीनी हकीकत देखकर लोग यही कहते नजर आए कि यह व्यवस्था अब इतिहास की किताबों में ही बेहतर लगती है।
जनता का सवाल सीधा है कि जब बैंकिंग, बीमा और सरकारी योजनाओं का इतना बड़ा भार डाक विभाग उठा रहा है, तो आखिर सुविधाओं और तकनीकी व्यवस्था के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही क्यों? फिलहाल सर्वर डाउन है, व्यवस्था डाउन है और जनता का भरोसा भी धीरे-धीरे डाउन होता जा रहा है।