रिपोर्ट: राहुल मिश्रा।
मिश्रिख। तीर्थ नगरी मिश्रिख में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनी ऐतिहासिक सनातनी धर्मशाला में नियमों की अनदेखी और अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। कानपुर के व्यवसायी कल्लूमल द्वारा निर्मित कराई गई ‘कल्लूमल उदयराम धर्मशाला’ को लेकर शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच व धर्मशाला को कब्जा मुक्त कराने की मांग की गई है।
समाजसेवी अपूर्व पाण्डेय द्वारा संपूर्ण समाधान दिवस अधिकारी को सौंपे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने खुद को धर्मशाला का कर्ताधर्ता घोषित कर रखा है। धर्मशाला के कमरों को श्रद्धालुओं के बजाय मासिक किराये पर बाहरी व्यक्तियों को दिया जा रहा है, जबकि यहां दर्शन-पूजन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को कमरे खाली न होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार धर्मशाला परिसर में ही बजरंगबली का मंदिर स्थित है। आरोप है कि नियमों के विपरीत अनाधिकृत रूप से रह रहे लोगों द्वारा परिसर में मांस-मदिरा का सेवन किया जाता है, जिससे धार्मिक मर्यादा भंग हो रही है। धर्मशाला की नियमावली के अनुसार किसी भी व्यक्ति के तीन दिन से अधिक रुकने पर स्थानीय पुलिस सत्यापन अनिवार्य होता है।
प्रशासन से मांग की है कि मामले की स्थलीय जांच कराकर धर्मशाला को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए तथा इसे पुनः तीर्थयात्रियों के ठहरने योग्य बनाया जाए।


