मथुरा। पर्यटन विभाग, लखनऊ द्वारा संचालित उत्तर प्रदेश ग्रामीण पर्यटन परियोजना के अंतर्गत आदर्श सेवा समिति द्वारा जनपद मथुरा के पर्यटन ग्राम मुखरई एवं जैत में रामचंद्र पब्लिक स्कूल, गोवर्धन के 42 विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक क्यूरेटेड टूर का आयोजन किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण जीवनशैली, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक लोक कलाओं, कृषि गतिविधियों तथा स्थानीय आजीविका के विभिन्न पहलुओं से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।

भ्रमण के प्रथम चरण में विद्यार्थियों ने पर्यटन ग्राम मुखरई स्थित मुखरा देवी मंदिर के दर्शन किए। मंदिर के पुजारी ने विद्यार्थियों को ग्राम मुखरई की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विशेषताओं तथा इसके सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने मंदिर परिसर में स्थित राधा रानी के खिलौने के रूप में प्रसिद्ध ‘बाजन शिला’ के दर्शन किए तथा उसे बजाकर आनंद लिया। इस अनुभव के माध्यम से विद्यार्थियों को स्थानीय धार्मिक मान्यताओं एवं परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिला।
इसके बाद विद्यार्थियों ने ग्राम में लड्डू गोपाल की पोशाक तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों से मुलाकात की और पोशाक निर्माण की पारंपरिक प्रक्रिया को समझा। विद्यार्थियों ने कारीगरों से इस कला में प्रयुक्त सामग्री, निर्माण की विधि तथा इसके महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान उन्होंने पर्यटन विभाग द्वारा पंजीकृत गोविन्द शरण होमस्टे का भी अवलोकन किया तथा ग्रामीण पर्यटन के अंतर्गत पर्यटकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के बारे में जाना।
इसके पश्चात विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के रूप में सम्मानित पर्यटन ग्राम जैत का भ्रमण किया। यहाँ ग्राम स्टोरीटेलर के माध्यम से विद्यार्थियों को गांव की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों ने पौराणिक जय कुंड का अवलोकन किया तथा इसके स्थानीय एवं सांस्कृतिक महत्व को समझा।
जैत भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय शिल्पकार सूरज से मुलाकात कर मिट्टी के बर्तनों के निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखा। उन्होंने पारंपरिक कुम्हारी कला में प्रयुक्त तकनीकों, मिट्टी तैयार करने की विधि तथा बर्तनों को आकार देने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रामीण शिल्प एवं पारंपरिक कारीगरी की बारीकियों को समझने का अवसर मिला।
भ्रमण का एक प्रमुख आकर्षण तुलसी की खेती एवं तुलसी की कंठी-माला निर्माण की पारंपरिक कला रही। विद्यार्थियों ने तुलसी की खेती की प्रक्रिया, तुलसी के पौधों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा उनसे कंठी-माला तैयार करने की विधि के बारे में जानकारी प्राप्त की।
इसके अतिरिक्त, गाय के गोबर से धूपबत्ती बनाने की प्रक्रिया से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया गया। इससे उन्हें स्थानीय संसाधनों के उपयोग, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसरों के बारे में समझ विकसित करने का अवसर मिला।
इस शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर ग्रामीण जीवनशैली, स्थानीय शिल्प, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत, कृषि गतिविधियों तथा पारंपरिक आजीविका को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
इस प्रकार के क्यूरेटेड टूर विद्यार्थियों में ग्रामीण पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय कला, संस्कृति एवं पारंपरिक व्यवसायों के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश ग्रामीण पर्यटन परियोजना के प्रबंधक ललित मोहन जोशी, जिला समन्वयक रामगोपाल दुबे, विलेज कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रकाश बृजवासी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, तुलसी की कंठी-माला निर्माण से जुड़े रमेश सिंह राजावत एवं तेजवीर सिंह तथा तुलसी की खेती और गाय के गोबर से धूपबत्ती निर्माण से जुड़े दीवान सिंह राजपूत ने विद्यार्थियों को अपने पारंपरिक कार्यों एवं अनुभवों की जानकारी दी।
रामचंद्र पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर भारत कौशिक, प्रधानाचार्य एम.एल. कौशिक, शिक्षकगण हरीश चंद्र एवं विनोद कुमार सहित अन्य शिक्षक भी विद्यार्थियों के साथ इस शैक्षणिक भ्रमण में शामिल रहे।


