‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानव चेतना’ विषय पर विशेष संवाद में एआई के सकारात्मक और संतुलित उपयोग पर जोर.
प्रयागराज। शंख प्रयागराज के तत्वावधान में चिन्मय मिशन अमृत महोत्सव के अवसर पर सिविल लाइंस स्थित जिला पंचायत सभागार में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानव चेतना’ विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति के. अजित कुमार मुख्य अतिथि, चिन्मय मिशन चेन्नई के आध्यात्मिक मार्गदर्शक स्वामी मित्रानंद मुख्य वक्ता तथा आध्यात्मिक वक्ता आचार्य शंतनु महाराज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति के. अजित कुमार ने कहा कि प्रत्येक आविष्कार के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होते हैं। इसका परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि मानव उसका किस दृष्टिकोण और उद्देश्य से उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग यदि विवेकपूर्ण तरीके से मानव क्षमताओं को विकसित करने के लिए किया जाए तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
उन्होंने चेताया कि यदि मनुष्य अपने प्रत्येक कार्य के लिए एआई पर निर्भर होने लगे और स्वयं चिंतन करना कम कर दे, तो इससे उसकी मौलिक मानवीय क्षमताएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए एआई का उपयोग मानव बुद्धि, रचनात्मकता और चेतना के विकास में सहायक के रूप में किया जाना चाहिए।
मुख्य वक्ता स्वामी मित्रानंद ने कहा कि भारत ने सदियों से सत्य की खोज को अपनी जीवन-दृष्टि का हिस्सा बनाया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकी विकास के एक नए युग का संकेत है, लेकिन इसके बावजूद मनुष्य की सत्य की खोज और आत्मचिंतन की यात्रा जारी रहेगी।
विशिष्ट अतिथि आचार्य शंतनु महाराज ने कहा कि एआई स्वयं मानव चेतना की उपज है। इसलिए तकनीक के विकास के साथ मानव चेतना और विवेक को भी समान रूप से विकसित करना आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. मृत्युंजय राव परमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता प्रतीक मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के क्यूरेटर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता समीर श्रीवास्तव रहे।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव, सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया शशि प्रकाश सिंह, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया शिव कुमार पाल, अपर महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी, शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्रा, मुख्य स्थायी अधिवक्ता शीतल, कार्तिकेय शुक्ल, शंख के संयोजक आलोक परमार सहित बड़ी संख्या में राज्य विधि अधिकारी, वरिष्ठ पदाधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे।