•किसानों को जागरूक करने के लिए ग्राम प्रधानों को भेजे पत्र, गठित की गईं ब्लॉक व तहसील स्तरीय समितियां
रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। फसल अवशेष एवं पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उप कृषि निदेशक आवेश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद के सभी ग्राम प्रधानों को अर्द्धशासकीय पत्र भेजकर पराली न जलाने के लिए किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही विकासखंड एवं तहसील स्तर पर समितियों तथा सचल दस्तों का गठन किया गया है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए जनपद स्तरीय मॉनीटरिंग सेल भी गठित किया गया है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जारी शासनादेश के तहत कृषि, राजस्व, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, खाद्य एवं रसद, नगर विकास, पशुपालन, शिक्षा और पुलिस विभाग सहित संबंधित विभागों को उनके दायित्वों के संबंध में निर्देशित किया गया है।
धान की कटाई में भी नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सभी कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों को पत्र जारी किए गए हैं। एसएमएस (स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम) लगाए बिना कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई प्रतिबंधित की गई है।
पराली जलाने पर 30 हजार रुपये तक क्षतिपूर्ति
उप कृषि निदेशक ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेश के अनुसार फसल अवशेष जलाना दंडनीय अपराध है। राजस्व विभाग के आदेश के तहत फसल अवशेष जलाने पर क्षेत्रफल के अनुसार क्षतिपूर्ति वसूली का प्रावधान है। दो एकड़ से कम क्षेत्र में 5,000 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 10,000 रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में 30,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति वसूल की जा सकती है। उल्लंघन की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित के विरुद्ध अर्थदंड सहित अन्य कार्रवाई का भी प्रावधान है।
पराली न जलाकर मिट्टी में मिलाने की अपील
उप कृषि निदेशक ने जनपद के किसानों से अपील की है कि किसी भी फसल के अवशेष को खेतों में न जलाएं। इसके बजाय पादप अवशेषों को मृदा में मिलाकर अथवा सड़ाकर मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में उपयोग करें। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मित्र कीट नष्ट होते हैं और इससे पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


