रिपोर्ट: मनोज अग्रहरि
मीरजापुर। माननीय उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश / अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर के कुशल मार्गदर्शन में गांधी जयंती के अवसर पर ‘लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act, 2012) के प्रावधानों एवं कानूनी परिणामों के संबंध में विशेष विधिक जागरूकता अभियान’ का आयोजन जनपद मीरजापुर में किया गया।
इसी क्रम में जनपद न्यायालय परिसर, मीरजापुर में माननीय जनपद न्यायाधीश / अध्यक्ष, श्री अनुपम कुमार के द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के प्रतिमा पर माल्यर्पण कर विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समस्त न्यायिक अधिकारियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव द्वारा उपस्थित कर्मचारियों एवं छात्र/छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी प्रदान की गई।
इसी कम में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ।। सोनाली मिश्रा द्वारा बताया गया कि पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बालक/बालिका के रूप में विधिक संरक्षण प्राप्त है तथा बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का लैंगिक दुर्वयवहार, लैंगिक उत्पीड़न अथवा लैंगिक अपराध कानूनन दंडनीय है।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बच्चों एवं अभिभावकों को यह भी बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे की सहमति को पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत वैध सहमति नहीं माना जाता। किशोर-किशोरियों को सोशल मीडिया, मोबाइल फोन एवं इंटरनेट के माध्यम से होने वाले लैंगिक शोषण, अनुचित सम्पर्क तथा साइबर अपराधों से सावधान रहने के संबंध में भी जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों को किसी भी संदिग्ध अथवा असहज स्थिति में तत्काल अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को जानकारी देने तथा आवश्यकतानुसार पुलिस, बाल कल्याण समिति एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रभात फेरी के माध्यम से जन-जागरूकता विशेष अभियान के अंतर्गत जनपद न्यायालय परिसर से प्रभात फेरी का आयोजन भी किया गया। प्रभात फेरी के माध्यम से बाल संरक्षण एवं पॉक्सो अधिनियम के संबंध में जनसामान्य को जागरूक किया गया। प्रतिभागियों द्वारा विभिन्न जागरूकता संदेशों एवं नारों के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा, सम्मान एवं अधिकारों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
प्रभात फेरी के दौरान यह संदेश प्रमुख रूप से प्रसारित किया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के मामले में कानून विशेष संरक्षण प्रदान करता है’ तथा बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के लैंगिक अपराध की सूचना छिपाने के स्थान पर उसकी तत्काल सूचना संबंधित सक्षम प्राधिकारी को दी जानी चाहिए।
राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर), मीरजापुर में पुस्तक वितरण
अभियान के अंतर्गत राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर), मीरजापुर में भी विधिक जागरूकता एवं बाल संरक्षण से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर किशोरों को उनके विधिक अधिकारों, शिक्षा के महत्व, बाल संरक्षण संबंधी कानूनों तथा समाज में जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनकी भूमिका के संबंध में जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के उपरांत किशोरों में ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी पुस्तकों का वितरण किया गया। पुस्तक वितरण का उद्देश्य किशोरों में अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करना, सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करना तथा उनके व्यक्तित्व एवं बौद्धिक विकास में सहयोग प्रदान करना रहा। उपस्थित अधिकारियों एवं विधिक सेवा कार्यकर्ताओं द्वारा किशोरों को नियमित अध्ययन करने, अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने तथा जीवन में सकारात्मक दिशा अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर आनन्द कुमार-।। के द्वारा बताया गया कि विधिक जागरूकता केवल कानून की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर बच्चों एवं किशोरों को उनके अधिकारों, सुरक्षा एवं उपलब्ध विधिक सहायता के साधनों से परिचित कराना भी है।
कार्यक्रम के दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन 112. बाल कल्याण समिति तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध सहायता एवं निःशुल्क विधिक सेवाओं के संबंध में भी जानकारी दी गई। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार की समस्या, शोषण अथवा अपराध की स्थिति में वे सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित सक्षम संस्था से सम्पर्क कर सकते हैं तथा विधिक सहायता प्राप्त करना उनका अधिकार है।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर द्वारा यह भी बताया गया कि माननीय उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के अनुपालन में पॉक्सो अधिनियम, 2012 के संबंध में जनपद के विद्यालयों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं अन्य संवेदनशील स्थानों पर निरंतर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है, ताकि बच्चों एवं किशोरों को उनके विधिक अधिकारों एवं सुरक्षा उपायों की जानकारी प्राप्त हो सके तथा बाल लैंगिक अपराधों की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता एवं संवेदनशीलता विकसित की जा सके।


