अयोध्या पुस्तक मेले में कहानी की ताकत, मानवीय संवेदनाओं और ब्रांड रणनीति पर रखे विचार
बस्ती। एक अच्छी कहानी न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि सोचने का नजरिया बदलने और समाज की सोच व संस्कारों पर गहरी छाप छोड़ने की क्षमता भी रखती है। यह बात हर्रैया नगर पंचायत निवासी लेखक एवं ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट गौरव कुमार निगम ने अयोध्या में आयोजित अयोध्या-फैजाबाद पुस्तक मेले में ‘एक कहानी, कई नजरिए’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र में कही। उन्होंने महाभारत के शकुनि के चरित्र से लेकर विज्ञापन जगत के चर्चित अभियानों तक के उदाहरणों के माध्यम से कहानी के प्रभाव को समझाया।
नारायण दास खत्री मेमोरियल ट्रस्ट, अयोध्या की ओर से आयोजित सत्र में निगम ने कहा कि कहानियां वास्तविकता और कल्पना के बीच सेतु का काम करती हैं। इनके माध्यम से व्यक्ति न केवल अपने अनुभवों को बेहतर ढंग से समझता है, बल्कि दूसरों की परिस्थितियों और भावनाओं से भी जुड़ता है। कहानियां पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचारों, अनुभवों और मूल्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
शकुनि के चरित्र से समझाया नजरिये का महत्व
कहानी की संरचना पर चर्चा करते हुए निगम ने कथावस्तु, पात्र, संवाद, देशकाल एवं वातावरण, भाषाशैली और उद्देश्य को इसके प्रमुख तत्व बताया। महाभारत के शकुनि के चरित्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि किसी पात्र को केवल उसके कर्मों के आधार पर खलनायक मान लेना पर्याप्त नहीं है। उसके पीछे की परिस्थितियों और अनुभवों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने श्रोताओं को किसी भी चरित्र और घटना के विभिन्न पक्षों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन जगत में भी कहानी की अहम भूमिका
कहानी के व्यावसायिक प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने त्योहारों, उपहार देने की बदलती परंपराओं और विज्ञापन अभियानों के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि प्रभावी कहानी किसी उत्पाद की खूबियां बताने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित कर ब्रांड को विशिष्ट पहचान दिलाती है।
निगम ने कहा कि कहानीकार बनने के लिए असाधारण घटनाओं या विषयों का होना जरूरी नहीं है। आवश्यकता साधारण घटनाओं को असाधारण दृष्टि से देखने की है। कहानी लेखन के लिए उन्होंने अवलोकन, संवेदनशीलता, सहानुभूति, जिज्ञासा और कल्पनाशीलता को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही नियमित अध्ययन, दूसरों की बात ध्यान से सुनने और अपनी रचनाओं में निरंतर सुधार करने पर जोर दिया।
गौरव कुमार निगम हिंदी क्राइम थ्रिलर ‘स्कैंडल इन लखनऊ’ के लेखक हैं। लेखन के साथ उनकी रुचि अपराध-कथा, मानवीय व्यवहार और ब्रांड रणनीति में है। वे ब्रांड संचार में कहानी की भूमिका पर भी काम करते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर पुस्तक मेले की आयोजन समिति और नारायण दास खत्री मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से गौरव कुमार निगम को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने सत्र के सफल आयोजन के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।


