•3 अक्टूबर को षोडशी, 4 अक्टूबर को मनाया जाएगा आविर्भाव दिवस।
सीतापुर/नैमिषारण्य। नैमिषारण्य की पावन धरा ने अपनी आध्यात्मिक परंपरा के एक महान संत एवं दिव्य विभूति को खो दिया। पूज्य श्री स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज 17 सितंबर 2026 को महा समाधि में विलीन हो गए। उनके ब्रह्मलीन होने से नैमिषारण्य सहित देशभर के संतों, शिष्यों एवं भक्तों में शोक की लहर है।
लगभग 90 वर्ष की आयु में भी स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज का जीवन आध्यात्मिक साधना, आत्मनिष्ठा और ब्रह्मज्ञान को समर्पित रहा। उनके सानिध्य में आने वाले दुखी जनों और भक्तों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन के साथ जीवन में शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता था। नैमिषारण्य की परिक्रमा के दौरान वे मार्ग में मिलने वाली कन्याओं को श्रद्धाभाव से दक्षिणा देते थे। नारी मात्र में वे भगवती दुर्गा का स्वरूप देखते थे।
स्वामी जी की पट्ट शिष्या परिव्राजिका कुमारी विश्वभारती जी भी गुरु वियोग से अत्यंत दुखी हैं। इस कठिन समय में उन्होंने गुरु के उपदेशों को स्मरण करते हुए संतों और भक्तों को धैर्य प्रदान किया।
18 सितंबर को हुई शास्त्रोक्त विधि से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
18 सितंबर को ब्रह्मविज्ञान पीठ में बड़ी संख्या में संत, शिष्य एवं भक्त एकत्रित हुए। पूज्य स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज के पार्थिव शरीर को शास्त्रीय विधि एवं मंत्रोच्चारण के साथ स्वामी सदाशिवेंद्र, स्वामी चिदंबरानंद, स्वामी वागीशानंद सहित अन्य शिष्यों ने पंचामृत आदि से स्नान कराया। इस अवसर पर कुमारी विजयानंद भारती, अद्वैत भारती, कुमारी ब्रह्ममीमांसा भारती, सुमेधा, विश्वंभरा, अद्वैत सिद्धि, श्रुति सिद्धांत, ऋचा सहित अनेक समर्पित शिष्याएं उपस्थित रहीं।
इसके बाद भगवान नाम संकीर्तन के बीच भव्य एवं अनुशासित निर्वाण यात्रा निकाली गई। यात्रा चक्रतीर्थ एवं नैमिषारण्य के प्रमुख मंदिरों से होकर गुजरी और नैमिषारण्य की परिक्रमा पूर्ण की गई। बताया गया कि स्वामी जी महाराज लंबे समय से नैमिषारण्य की परिक्रमा करते आ रहे थे।
निर्वाण यात्रा के उपरांत पूज्य स्वामी जी के उत्तराधिकारी शिष्य महामंडलेश्वर स्वामी सदाशिवेंद्र सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद, स्वामी वीतरागानंद, सुबोधानंद जी सहित संतों एवं भक्तों ने शास्त्रोक्त विधि से आश्रम में द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर के समीप उनकी महासमाधि स्थापित की।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर श्री विद्यानंद जी, श्री संतोष खाकी, परिक्रमा अध्यक्ष स्वामी विमलानंद जी सहित अनेक संत एवं भक्त उपस्थित रहे।
3 अक्टूबर को षोडशी, 4 अक्टूबर को आविर्भाव दिवस
पूज्य स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज की षोडशी का आयोजन 3 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। वहीं पूज्य गुरुदेव का आविर्भाव दिवस मातृ नवमी तिथि के अवसर पर 4 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।
स्वामी जी महाराज के ब्रह्मलीन होने से ब्रह्मविज्ञान पीठ ही नहीं, बल्कि संपूर्ण नैमिषारण्य की आध्यात्मिक धरा शोकाकुल है। संतों और भक्तों ने कहा कि आत्मनिष्ठा एवं ब्रह्मज्ञान से परिपूर्ण उनका जीवन सदैव साधकों और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देता रहेगा।


