अलीगढ़। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में प्रस्तावित नई सहायक अध्यापक भर्ती को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों के बीच चयन प्रक्रिया एवं अकादमिक वेटेज के विषय में चर्चा तेज है। इसी क्रम में डीएलएड संयुक्त प्रशिक्षु संघ, जनपद अलीगढ़ के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी ने सरकार एवं संबंधित विभागों से मांग की है कि आगामी शिक्षक भर्ती में सुपर टेट के 60 प्रतिशत अंक एवं अकादमिक योग्यता के 40 प्रतिशत अंक को वेटेज देने वाली पुरानी चयन प्रक्रिया को ही लागू रखा जाए।
जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी ने कहा कि शिक्षक भर्ती की चयन प्रक्रिया केवल एक दिन आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थी की वर्षों की शैक्षणिक मेहनत, उसकी अकादमिक उपलब्धियां, शिक्षक-प्रशिक्षण तथा प्रतियोगी परीक्षा में प्रदर्शन—इन सभी का संतुलित एवं समग्र मूल्यांकन होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों द्वारा चयन प्रक्रिया से अकादमिक वेटेज को पूरी तरह हटाकर केवल सुपर टेट परीक्षा को 100 प्रतिशत आधार बनाने की मांग की जा रही है। यह व्यवस्था उन लाखों अभ्यर्थियों के हितों को प्रभावित कर सकती है, जिन्होंने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक एवं शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए वर्षों तक निरंतर मेहनत की है।
धर्मेन्द्र चौधरी ने कहा,“जब डीएलएड / बीटीसी जैसे शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में प्रवेश ही शैक्षिक योग्यता एवं अकादमिक मेरिट के आधार पर दिया जाता है, तो उसी प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद अभ्यर्थियों की अकादमिक उपलब्धियों को चयन प्रक्रिया में पूरी तरह नजरअंदाज कर देना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि शिक्षक भर्ती में अकादमिक मेरिट का कोई महत्व ही नहीं रहेगा, तो विद्यार्थियों के सामने यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से खड़ा होगा कि वे अपने पूरे शैक्षणिक जीवन में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत क्यों करें। अकादमिक उपलब्धियां किसी अभ्यर्थी की दीर्घकालिक मेहनत, अनुशासन, निरंतरता एवं शैक्षणिक क्षमता को दर्शाती हैं, इसलिए उन्हें पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उचित वेटेज दिया जाना चाहिए।
डीएलएड संयुक्त प्रशिक्षु संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी ने आगे यह भी कहा कि केवल एक परीक्षा के आधार पर शिक्षक का चयन करना अभ्यर्थी की वर्षों की शैक्षणिक उपलब्धियों का पूर्ण मूल्यांकन नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा,“न तो केवल अकादमिक मेरिट को चयन का एकमात्र आधार बनाया जाना चाहिए और न ही उसे पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। सुपर टेट एवं अकादमिक मेरिट दोनों का संतुलित वेटेज ही पारदर्शी, न्यायपूर्ण एवं समावेशी शिक्षक चयन प्रक्रिया का आधार बन सकता है।”
धर्मेन्द्र चौधरी ने उत्तर प्रदेश सरकार, बेसिक शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों, संबंधित विभाग के सचिव तथा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष से मांग की है कि प्रस्तावित नई शिक्षक भर्ती में पुरानी चयन प्रक्रिया को यथावत लागू किया जाए।
जिसमें सुपर टेट लिखित परीक्षा का 60 प्रतिशत वेटेज लगता है तथा अकादमिक योग्यता का 40 प्रतिशत वेटेज लगता है।
धर्मेन्द्र चौधरी ने आगे यह भी कहा कि पुरानी चयन व्यवस्था अभ्यर्थियों की प्रतियोगी परीक्षा की क्षमता के साथ-साथ उनकी वर्षों की शैक्षणिक मेहनत को भी उचित सम्मान देती है। यह व्यवस्था अधिक संतुलित, पारदर्शी एवं न्यायसंगत होने के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के शिक्षक अभ्यर्थियों के हितों का समुचित ध्यान रखती है।
अंत में जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र चौधरी ने कहा,“हम सरकार एवं संबंधित अधिकारियों से विनम्रतापूर्वक मांग करते हैं कि नई शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को स्पष्ट, पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण बनाते हुए पुरानी चयन व्यवस्था के अनुसार ही भर्ती आयोजित की जाए। वर्षों की अकादमिक मेहनत और सुपर टेट में प्राप्त प्रदर्शन दोनों को उचित महत्व देकर ही वास्तविक रूप से संतुलित एवं न्यायसंगत शिक्षक चयन सुनिश्चित किया जा सकता है।”