रिपोर्ट : अभिनव अग्रवाल।
नजीबाबाद। महादेव को समर्पित पवित्र सावन का महीना इस समय चल रहा है। सनातन धर्म में सावन मास के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है, लेकिन पहले सोमवार की बात ही कुछ और होती है। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को नगर के विभिन्न शिवालयों में लग रहा था मानों जैसे आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा हो। भक्तों ने भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए विशेष तैयारियां की थीं।
उन्होंने अपने घरों से जल, दूध, और अन्य पूजा सामग्री लेकर शिवालयों में पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से मंदिर गूंज उठे। नगर के सुराही बाजा६र स्थित प्रजापति शिव मंदिर में वेद पाठी पंडित मयंक भारद्वाज जी ने श्रद्धालुओं को बताया पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन महीने में ही देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया गया था।
मंथन से निकले विष (हलाहल) को ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था। विष के प्रभाव से उनके शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ गया था, जिसे शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था।
इसी परंपरा के तहत सावन माह में जलाभिषेक का विशेष फल माना जाता है। उन्होंने बताया कि श्रावण मास के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से भक्तों को विशेष फल मिलता हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।