-फिजियोथेरेपी विभाग की डा. अन्नपूर्णा और डा. नेहा रानी ने तैयार किया एआई-आधारित ओरल रिहैबिलिटेशन प्रोटोकॉल।
अलीगढ़। स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का प्रभाव अब फिजियोथेरेपी और पुनर्वास विज्ञान में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इसी दिशा में मंगलायतन विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग के शोधकर्ताओं ने एक बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय की शोधकर्ता डा. अन्नपूर्णा और डा. नेहा रानी द्वारा विकसित एक अभिनव एआई-आधारित पुनर्वास प्रणाली के लिए भारतीय पेटेंट आवेदन दाखिल किया गया है।
शोधकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत इस पेटेंट का शीर्षक “एन एआई-असिस्टेड टीएमजे-स्पेसिफिक योग-बेस्ड ओरल रिहैबिलिटेशन एंड हाइजीन प्रोटोकॉल इंप्लीमेंटेड थ्रू ए कंप्यूटर-इंप्लीमेंटेड रिहैबिलिटेशन गाइडेंस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम” है। इसका पेटेंट भारतीय पेटेंट कार्यालय में कराया गया है। कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने बताया कि विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को प्राथमिकता दी जा रही है। एआई और हमारी प्राचीन योग पद्धति का यह संगम चिकित्सा और पुनर्वास विज्ञान में मील का पत्थर साबित होगा। यह नवाचार समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। कुलसचिव कमांडर मनोज के. ने बताया कि संस्थान द्वारा शोध एवं पेटेंट से जुड़ी गतिविधियों के लिए हर संभव प्रशासनिक और ढांचागत सहयोग लगातार प्रदान किया जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. दिनेश शर्मा ने बताया कि अकादमिक गुणवत्ता का वास्तविक मूल्यांकन शोध की उपयोगिता से होता है। यह तकनीक विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों पर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी। डीन रिसर्च प्रो. रविकांत ने बताया कि डिजिटल हेल्थ और टेली-रिहैबिलिटेशन के इस दौर में एआई-आधारित यह प्रणाली मील का पत्थर साबित होगी।
क्या है टीएमजे विकार?
टेंपोरोमैंडीब्यूलर जॉइंट (टीएमजे) वह जोड़ है जो निचले जबड़े को खोपड़ी से जोड़ता है। इसमें समस्या होने पर मरीज को मुंह खोलने, चबाने, बोलने में परेशानी और चेहरे व गर्दन में गंभीर दर्द का सामना करना पड़ता है। बदलती जीवनशैली और मानसिक तनाव इसके मुख्य कारण हैं। प्रस्तावित प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फिजियोथेरेपी और योग का अनूठा समन्वय किया गया है। यह कंप्यूटर-आधारित तकनीक मरीज की दैनिक प्रगति को ट्रैक करती है और उसे जबड़े के विशेष योग-अभ्यास, नियंत्रित व्यायाम तथा मौखिक स्वच्छता (ओरल हाइजीन) के लिए डिजिटल मार्गदर्शन प्रदान करती है।
डिजिटल हेल्थ को मिलेगी नई दिशा
पारंपरिक उपचार में मरीज को बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है, लेकिन यह एआई प्रणाली घर पर ही मरीज का सटीक मार्गदर्शन और निगरानी (मॉनिटरिंग) करने में सक्षम है। भविष्य में यह प्रणाली टेली-रिहैबिलिटेशन और डिजिटल हेल्थ सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।