बस्ती। पतञ्जलि चिकित्सालय, सुरतीहट्टा (बस्ती) में “आयुर्वेद ही जीवन” विषय पर एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पावन यज्ञ से हुआ, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने विश्व कल्याण और आरोग्य की कामना के साथ आहुतियां दीं।

गोष्ठी के दौरान पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से प्रशिक्षित वैद्य धर्मेन्द्र कुमार गुप्ता ने आयुर्वेद का महत्व बताते हुए कहा कि आयुर्वेद ही जीवन को सुरक्षित रखने में समर्थ है। कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा की एक प्रणाली नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की संपूर्ण और सनातन कला है। ‘आयुषः वेदः इति आयुर्वेदः’अर्थात जो शास्त्र जीवन का बोध कराए, वही आयुर्वेद है। आधुनिक समय में जहाँ खान-पान में मिलावट और अनियमित दिनचर्या के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं, वहाँ आयुर्वेद ही ऐसा माध्यम है जो मानव जीवन को सुरक्षित और रोगमुक्त रख सकता है।” कहा कि आयुर्वेद का पहला सिद्धांत है ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं च’। यानी स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग को दूर करना। जड़ी-बूटियों, संयमित आहार और प्राकृतिक नियमों पर आधारित होने के कारण आयुर्वेद शरीर को बिना किसी दुष्प्रभाव के पुनर्जीवन प्रदान करता है।
जीवन शैली में सुधार: योग, प्राणायाम, दिनचर्या और ऋतुचर्या का पालन करके मनुष्य गंभीर से गंभीर असाध्य रोगों से बच सकता है।
ओम प्रकाश आर्य संचालक रचित आयुर्वेद एंड जनरल स्टोर पतंजलि चिकित्सालय सुरतीहट्टा बस्ती ने आयुर्वेद की प्रामाणिकता और उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के लक्षणों को दबाता नहीं है, बल्कि रोग की जड़ वात, पित्त और कफ का असंतुलन पहचानकर उसका स्थाई समाधान करता है।
इस अवसर पर ओम प्रकाश आर्य ने वैद्य धर्मेन्द्र कुमार गुप्ता को ओम पट्टिका पहनाकर सत्यार्थ प्रकाश और ओम चित्र भेंट किया और जनसमुदाय से आह्वान किया कि वे अपनी दिनचर्या में आयुर्वेद और योग को अपनाएं तथा प्रकृति की ओर लौटें, क्योंकि “आयुर्वेद ही जीवन को पूर्णतः सुरक्षित एवं आरोग्य बनाने में समर्थ है। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से राधेश्याम आर्य, शिव श्याम,रजनीश कुमार, गणेश आर्य, नितीश कुमार, गरुण ध्वज पाण्डेय, दिलीप कुमार, राधा देवी, नीलम मिश्रा सहित अनेक आयुर्वेद प्रेमी तथा सम्भ्रांत नागरिक सम्मिलित रहे।