गोस्वामी तुलसीदास का योगदान अद्वितीय और युगांतरकारी- प्रो. दीक्षित

Vijaydoot News

हिन्दुस्तानी एकेडेमी में गोस्वामी तुलसीदास के जन्म-जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित 

प्रयागराज। हिन्दुस्तानी एकेडेमी के तत्वावधान में आज गोस्वामी तुलसीदास के जन्म-जयंती के अवसर पर ‘भक्तिकालीन साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती जी की प्रतिमा एवं गोस्वामी तुलसीदास के चित्र पर  माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पायल सिंह ने कहा कि ‘गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के माध्यम से समाज को हर रिश्ते में एक आदर्श व्यक्तित्व को दर्शाया है। 

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित, पूर्व विभागाध्यक्ष, हिन्दी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ ने कहा कि हिन्दी भक्ति काव्य परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान अद्वितीय और युगांतरकारी है। उन्होंने कविता का ध्येय लोक मंगल बनाया और राजाश्रय का त्याग कर जनसामान्य को साहित्य के केंद्र में रखा। लोकभाषा में रचना कर तुलसी ने भक्ति और साहित्य को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया। 

संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता प्रो. बृजेश कुमार पाण्डेय विभागाध्यक्ष, हिन्दी, इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने ‘भक्तिकालीन साहित्य में गोस्वामी तुलसीदास का योगदान’ पर प्रकाश पर डालते हुए कहा ‘तुलसी ने जनता को लोक धर्म की ओर मोड़ा, जिस कारण जनता ने लोक की रक्षा करने वाले प्राकृतिक धर्म का मनोहर रूप देखा। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अरूण कुमार मिश्रा, सहायक आचार्य, हिन्दी विभाग, मुनीश्वर दत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय, प्रतापगढ़ ने किया। कार्यक्रम के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन एकेडेमी के प्रशासनिक अधिकारी रतन पाण्डेय ने किया।