लखनऊ। समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और समावेशी पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से कमिश्नरेट लखनऊ में वर्ष 2025 बैच के रिक्रूट आरक्षियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। 20 अगस्त को रिजर्व पुलिस लाइन्स स्थित संगोष्ठी सदन में आयोजित कार्यशाला का विषय “पीड़ितों एवं बच्चों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व संवेदनशील संवाद कैसे स्थापित किया जाए” रहा।उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के क्रम में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कमिश्नरेट लखनऊ के सभी थानों से वर्ष 2025 बैच के 68 रिक्रूट आरक्षियों ने प्रतिभाग किया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य नवआरक्षियों को संवेदनशील, सजग और प्रभावी प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले पुलिसकर्मी के रूप में तैयार करना रहा।प्रशिक्षण सत्र में यूनिसेफ की डिविजनल कंसल्टेंट रिजवाना परवीन ने प्रतिभागियों को पीड़ितों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने के व्यवहारिक तरीकों की जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि घटनास्थल अथवा थाने पर पहुंचने के बाद पीड़ित की बात धैर्यपूर्वक सुनना, उसकी भावनात्मक स्थिति को समझना और उसे आवश्यक सहयोग एवं सुरक्षा का भरोसा दिलाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला में संवाद कौशल और व्यवहारिक विकास के साथ महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े विभिन्न कानूनों और प्रावधानों की जानकारी दी गई। इनमें घरेलू हिंसा से संबंधित कानून, किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम प्रमुख रहे। इसके अलावा वन स्टॉप सेंटर, बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड की भूमिका एवं कार्यप्रणाली के बारे में भी प्रतिभागियों को बताया गया।प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में आवश्यक सहयोग, संरक्षण तथा विधिक प्रक्रिया को लेकर भी पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक जानकारी दी गई, ताकि वे पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार करते हुए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें।
कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार और पुलिस उपायुक्त मुख्यालय अमित कुमावत के मार्गदर्शन में किया गया। पुलिस उपायुक्त महिला अपराध एवं सुरक्षा ममता रानी चौधरी के निर्देशन तथा सहायक पुलिस आयुक्त महिला अपराध शाहिदा नसरीन के पर्यवेक्षण में प्रशिक्षण सत्र संपन्न हुआ।
कमिश्नरेट लखनऊ की ओर से कहा गया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिसकर्मियों के संवाद कौशल, व्यवहारिक दक्षता और विधिक ज्ञान को लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिससे महिलाओं, बच्चों और प्रत्येक पीड़ित को समयबद्ध, मानवीय और प्रभावी पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा सके।