सुल्तानपुर। विकास खंड अखंडनगर की ग्राम पंचायत गिधौना में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच करने पहुंचे खंड विकास अधिकारी का रवैया ग्रामीणों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के दौरान जब उन्होंने पारदर्शिता के लिए मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया तो बीडीओ नाराज हो गए और कथित तौर पर साफ शब्दों में कह दिया कि वीडियो बनाओगे तो मैं जांच नहीं करूंगा। ग्रामीणों के वीडियो बनाना जारी रखने पर अधिकारी कथित रूप से बिना स्थलीय सत्यापन किए ही वापस लौट गए।
मामला तब गरमाया जब ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत ग्रामीणों ने मुख्य विकास अधिकारी सुल्तानपुर से की। सीडीओ के निर्देश पर बीडीओ को मौके पर पहुंचकर जांच करनी थी। इसी क्रम में बीडीओ टीम के साथ गिधौना पहुंचे। ग्रामीणों के मुताबिक जांच शुरू होने से पहले ही मौके पर मौजूद लोगों ने कार्रवाई की पारदर्शिता के लिए मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का दावा है कि वीडियो बनाए जाने पर बीडीओ ने आपत्ति जताई और वीडियो बंद करने को कहा। जब ग्रामीणों ने वीडियो बनाना बंद नहीं किया तो अधिकारी ने जांच नहीं करने की बात कही और मौके से लौट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान न तो विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन हुआ और न ही कथित अनियमितताओं की मौके पर जांच की गई।शौचालय से लेकर अमृत सरोवर तक
अनियमितता के आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान जयविन्द विश्वकर्मा और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए शौचालय निर्माण, नाली, खड़ंजा मरम्मत, प्रधानमंत्री आवास, खेल मैदान और अमृत सरोवर समेत कई विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितता किए जाने की शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई कार्यों में सरकारी धन खर्च होने के बावजूद मौके पर काम की स्थिति दावों के अनुरूप नहीं है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतों को लेकर आवाज उठाने वालों को प्रधान की ओर से रसूख का हवाला देकर दबाव में लेने तथा फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सीडीओ के आदेश के बावजूद जांच अधूरी!
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सीडीओ ने शिकायत पर स्थलीय जांच के निर्देश दिए थे, तो जांच अधिकारी बिना भौतिक सत्यापन किए वापस क्यों लौटे? ग्रामीणों का कहना है कि जांच प्रक्रिया को कैमरे में रिकॉर्ड किए जाने पर आपत्ति जताना पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
ग्राम सभा के सचिन सिंह, बाबूलाल, रमेश सिंह, प्रदीप कुमार, इन्द्रजीत निषाद, नन्दलाल निषाद समेत अन्य ग्रामीणों ने पूरे मामले की दोबारा उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्थानीय स्तर की जांच पर भरोसा नहीं रह गया है और अब वे जिलाधिकारी व अन्य उच्चाधिकारियों से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे।