लखनऊ। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी फर्म तैयार कर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने और उसे दूसरी फर्मों को पास-ऑन कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ लखनऊ क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। संयुक्त टीम ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, फर्जी लेन-देन के इस नेटवर्क से सरकारी राजस्व को करीब 27 लाख 30 हजार रुपये की क्षति पहुंचाई गई।
पुलिस के मुताबिक, पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट लखनऊ तरुण गाबा और संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार के निर्देश पर फर्जी फर्मों के माध्यम से जीएसटी कर चोरी एवं सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाने वाले व्यक्तियों और गिरोहों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव और अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के निर्देशन में क्राइम ब्रांच लखनऊ को यह सफलता मिली।मामला एम/एस घनश्याम एंटरप्राइजेज से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 30 अगस्त 2025 को प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर फर्म के संबंध में जांच शुरू की गई थी।
उक्त फर्म ने अनव्रॉट लेड वेस्ट, पैरिंग्स तथा प्लास्टिक के स्क्रैप की खरीद-बिक्री के लिए जीएसटी पहचान संख्या प्राप्त की थी। जांच के दौरान फर्म के पंजीकरण और कारोबार से संबंधित दस्तावेजों में कई अनियमितताएं सामने आईं।जांच में पता चला कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विभिन्न फर्मों और कंपनियों के साथ कागजी लेन-देन दर्शाया गया और उसके आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा तथा उसे आगे पास-ऑन किया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से वास्तविक कारोबार के विपरीत फर्जी आईटीसी का नेटवर्क तैयार कर जीएसटी कर का अपवंचन किया जा रहा था।
मामले में थाना हसनगंज में मुकदमा अपराध संख्या 130/2025 के तहत धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) बीएनएस में अभियोग पंजीकृत किया गया था। क्राइम ब्रांच ने मामले से जुड़े आरोपियों की लगातार तलाश के साथ तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसके बाद थाना हसनगंज पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए 22 अगस्त 2026 को चार वांछित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वैभव सिंह, उम्र करीब 35 वर्ष, बीटेक; मोहम्मद अरसान, उम्र करीब 32 वर्ष, बीकॉम; विकास कुमार मिश्रा, उम्र करीब 35 वर्ष, बीए-एलएलबी; तथा मो. साकिब, उम्र करीब 28 वर्ष, बीए के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी फर्म का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न कंपनियों और फर्मों से संपर्क करते थे। इसके बाद कागजी लेन-देन के माध्यम से फर्जी आईटीसी एक-दूसरे को पास-ऑन कर आर्थिक लाभ कमाया जाता था। इस तरह बिना वास्तविक कारोबार के फर्जी बिल और लेन-देन का नेटवर्क तैयार कर जीएसटी कर की चोरी की जा रही थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही फर्जी जीएसटी फर्म और फर्जी आईटीसी के माध्यम से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य संभावित सहयोगियों तथा संबंधित फर्मों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। क्राइम ब्रांच दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर इस नेटवर्क से जुड़ी अन्य कड़ियों का पता लगाने में जुटी है।