सिंडिकेट के बचे हुए स्लीपर सेल व वित्तीय मददगारों की तलाश में जुटी एसआइटी।

Vijaydoot News

•जेल में बंद आरोपित पंकज के खाते से हुआ था 3 करोड़ का ट्रांजैक्शन।
•फर्जी फर्मों और बैंक खातों के जरिए खपाए गए थे करोड़ों रुपये।
•अवैध नशे के कारोबार पर एसआइटी का शिकंजा लगातार तेज।
•शेल कंपनियों, फर्जी खातों के जरिए चल रहा था अवैध खेल।

बस्ती: बहुचर्चित 1.72 लाख कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी के अवैध कारोबार के मामले में एसआइटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परत-दर-परत मामले सामने आ रहे हैं। पुलिस तथा एसआइटी इस सिंडिकेट के अन्य बचे हुए स्लीपर सेल और वित्तीय मददगारों की तलाश में जुटी हुई है। इस बहुचर्चित सिंडिकेट की जांच में जुटी एसआइटी के हाथ एक अहम सुराग लगा है।

जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े और वर्तमान में जिला जेल बस्ती में बंद आरोपित वाराणसी निवासी पंकज कुमार के बैंक खाते के जरिए महज छह महीने के भीतर 3 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध ट्रांजैक्शन किया गया था।

एसआइटी सूत्रों के मुताबिक, गणपित फार्मा का संचालक आरोपित पंकज कुमार, भोला जायसवाल, देवेश, धर्मेंद्र और उसके सहयोगियों ने इस अवैध कारोबार को छुपाने के लिए कई कागजी और फर्जी फर्मों का सहारा लिया था।

बैंक खातों की स्क्रूटनी के दौरान यह बात पुख्ता हुई कि प्रतिबंधित कोडीन सिरप की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त और सप्लाई के एवज में करोड़ों रुपयों का हेरफेर किया गया है। अकेले आरोपित पंकज के खाते से लगभग 3 करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन की पुष्टि होने के बाद जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है।

इसी के खाते में शेष बची रकम 8.95 लाख रुपये पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर जब्त कर लिया है। कोडीन सिरप के इस काले कारोबार के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। पूर्व में भी जांच एजेंसियों और अदालतों द्वारा इस नेटवर्क से जुड़े आरोपितों की संपत्तियों और बैंक खातों को कुर्क करने की कार्रवाई की जा चुकी है।

मनी लांड्रिंग और अन्य एंगल पर भी फोकस:
एसआइटी अब इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस 3 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन के पीछे और कौन-कौन से चेहरे शामिल थे और इस अवैध कमाई को किन-किन संपत्तियों में निवेश किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं और अन्य सहयोगियों की संपत्तियां भी जब्त की जा सकती हैं।

एसआइटी के विवेचक ने पूछे जाने पर बताया कि जिले के संस फार्मा,आइडियल फार्मा समेत अन्य फर्म संचालकों की भूमिका एसआइटी की ओर तलाशी जा रही है। अभी भी विवेचना प्रचलित है।

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