छाता में प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित।

Vijaydoot News

रासायनिक खादों से मुक्ति और यमुना-गंगा संरक्षण के लिए किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

मथुरा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नई दिल्ली एवं राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश) के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी एवं अध्यक्ष, जिला गंगा समिति, मथुरा के निर्देशानुसार जिला गंगा समिति द्वारा कृषि विभाग के संयोजन से तहसील छाता स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करना रहा।

प्राकृतिक खेती से पर्यावरण और नदी तंत्र का संरक्षण

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि खेतों में रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से हानिकारक तत्व नदियों और भूजल तक पहुंचकर जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। प्राकृतिक खेती अपनाने से यमुना-गंगा नदी बेसिन के साथ-साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

कम लागत में बेहतर उत्पादन पर जोर

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को देसी गाय के गोबर एवं गोमूत्र से जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने की विधियां समझाईं। बताया गया कि इन प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाया जा सकता है।

मृदा स्वास्थ्य सुधार की दी जानकारी

विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक घटकों का उपयोग करने से मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं एवं केंचुओं की सक्रियता बढ़ती है। इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार होने के साथ टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।

विशेषज्ञ एवं विभागीय अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में जिला गंगा समिति के जिला परियोजना अधिकारी अमन वर्मा, लैब प्रभारी एवं मृदा विश्लेषक ईश्वर दयाल, कृषि चिकित्सक डॉ. विपिन जादौन, ब्लॉक टेक्नीशियन मैनेजर नीरज कुमार वार्ष्णेय, टेक्निकल असिस्टेंट लोकेन्द्र देव सिंह तथा बीज गोदाम प्रभारी लाखन सोलंकी मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने किसानों को सरकारी योजनाओं, उन्नत बीजों तथा प्राकृतिक खाद प्रबंधन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

वन विभाग की ओर से वन दरोगा देवेन्द्र कुमार एवं वन रक्षक धर्मेन्द्र कुमार ने भी सहभागिता की। उन्होंने कृषि वानिकी एवं वृक्षारोपण से होने वाले लाभों के बारे में किसानों को जानकारी दी।

कार्यशाला में क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर किसानों ने अपने खेतों में प्राकृतिक कृषि पद्धतियां अपनाने तथा जल एवं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।