रिपोर्ट: संजय त्रिपाठी।
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज क्षेत्र के बहेरिया चौराहे पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम के चौथे दिन रविवार की रात कथावाचक आचार्य सतीश शास्त्री ने महापुराण के महत्व पर प्रकाश डाला।
कथावाचक ने कहा कि कथा की सार्थकता तब ही सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन व व्यवहार में धारण कर निरंतर भगवान का स्मरण करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट हो जाते हैं। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ व मोक्ष प्राप्ति के लिए कठिन प्रयास करने पड़ते हैं, वहीं कलियुग में कथा सुनने मात्र से ही व्यक्ति भवसागर पार हो जाता है। शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है, इसके श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलयुग में भी इसके प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते है। कलियुग में भागवत साक्षात श्री हरि का रूप है, पवन हृदय से इसका स्मरण करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त होता है।
इस दौरान यज्ञाचार्य संदीप शास्त्री, ज्ञानदास प्रजापति, प्रदीप पाण्डेय, डा.रजनीश प्रजापति, सुधीर, अशीष, प्रशांत, कैलाश शुक्ला आदि मौजूद रहे।


