•व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, शुल्क लगाने की व्यवस्था वापस लेने की मांग
विजय दूत (मयंक त्रिपाठी)
औरैया। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बीच यूपीआई से लेन-देन पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की औरैया इकाई ने प्रस्तावित व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला बताया है। व्यापारियों ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में सामान्य व्यापारिक लेन-देन पर शुल्क नहीं लगाने की मांग की।
जिलाध्यक्ष राजेश बाजपेई (बबलू), जिला चेयरमैन रामकुमार बिश्नोई, जिला कोषाध्यक्ष मलखान सिंह वर्मा, जिला महामंत्री स्वतंत्र अग्रवाल, नगर अध्यक्ष सतीश वर्मा, नगर चेयरमैन रानू अवस्थी और नगर महामंत्री दीपक अग्रवाल समेत अन्य पदाधिकारियों ने ज्ञापन में कहा कि व्यापार मंडल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की सरकारी पहल का स्वागत करता है, लेकिन यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से इस व्यवस्था की कम लागत वाली सुविधा प्रभावित हो सकती है। ज्ञापन के अनुसार, दो हजार रुपये से अधिक के व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क और पूंजी बाजार से जुड़े कुछ लेन-देन पर पांच प्रतिशत तक शुल्क लगाने की व्यवस्था का असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। किराना, कपड़ा, हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, दवा, फल-सब्जी और होटल-रेस्तरां जैसे कारोबार में दो हजार रुपये से अधिक का डिजिटल भुगतान सामान्य बात है। ऐसे में शुल्क लागू होने पर व्यापारियों की लागत बढ़ने की आशंका है।
लागत बढ़ी तो नकद लेन-देन को प्राथमिकता दे सकते हैं व्यापारी
व्यापार मंडल का कहना है कि भले ही प्रस्तावित शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाए, लेकिन इसका आर्थिक भार व्यापारियों की कमाई पर पड़ेगा। पहले से किराया, बिजली, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों का सामना कर रहे छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क परेशानी बढ़ा सकता है। मंडल ने आशंका जताई कि लागत बढ़ने पर कुछ व्यापारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद लेन-देन को प्राथमिकता देने लगेंगे। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय लक्ष्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
प्रोत्साहन देने की मांग, शुल्क लगाने का विरोध
व्यापार मंडल ने मांग की कि यूपीआई को अपनाने वाले छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के बजाय उन्हें प्रोत्साहन दिया जाए। संगठन का कहना है कि यूपीआई की लोकप्रियता की प्रमुख वजह इसका सरल, तेज और कम लागत वाला होना है। ऐसे में किसी भी नई शुल्क व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापारियों की आर्थिक स्थिति और व्यावहारिक कठिनाइयों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से मंडल ने चार प्रमुख मांगें उठाईं। इनमें दो हजार रुपये से अधिक के सामान्य व्यापारिक यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क लागू नहीं करने, छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन अथवा शुल्क में छूट की योजना शुरू करने, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम, बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और प्रमुख व्यापारी संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श करने तथा छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग शामिल है। व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध डिजिटल भुगतान व्यवस्था से नहीं, बल्कि व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालने वाली प्रस्तावित व्यवस्था से है। संगठन ने प्रधानमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर प्रस्ताव की पुनः समीक्षा कराने और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की।
इस मौके पर मुन्ना गहोई, गौर हरि मिश्रा, रिंकू शुक्ला, अवधेश तिवारी, मयंक शुक्ला, आरती नन्दन तिवारी, गोविन्द पाठक, अवनीश राजपूत, रामकुमार विश्नोई, मुकेश कुमार, रजत पाण्डेय, अमर विश्नोई, गजेन्द्र सिंह, राशिद खान, आदि व्यापारी शामिल रहे।


