रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शाही ईदगाह मस्जिद और मीना मस्जिद को हटाने से संबंधित मामले में न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू और मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता मौजूद रहे। न्यायालय में पूर्व में दाखिल विभिन्न प्रार्थना पत्रों पर चर्चा की गई और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपना-अपना पक्ष एवं विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मथुरा के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कारसेवा से संबंधित रिपोर्ट तलब की थी। संबंधित रिपोर्ट शासन एवं प्रशासन की ओर से बंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण में हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर निर्णय करता है। उन्होंने दावा किया कि हिंदू पक्ष की ओर से प्राचीन साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। सुनवाई के दौरान पूर्व में दाखिल कुछ प्रार्थना पत्रों पर भी विचार किया गया तथा कुछ बिंदुओं पर बहस आगे बढ़ी।
फलाहारी महाराज ने मुस्लिम पक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके पास कथित रूप से पानी और बिजली के बिल जैसे दस्तावेज नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष का मानना है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान की वास्तविक स्थिति को ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय के समक्ष रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष की मांग है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान से संबंधित विवाद का न्यायालय द्वारा साक्ष्यों एवं कानून के आधार पर निस्तारण किया जाए। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर की तर्ज पर मथुरा में भी भगवान श्रीकृष्ण का भव्य एवं दिव्य मंदिर बनाए जाने की इच्छा व्यक्त की।मामले में अब अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी।