गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी का बड़ा संदेश: भारत की प्रगति रोकने वाली ताकतों से सतर्क रहने का आह्वान, सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर।

Vijaydoot News

गोरखपुर/लखनऊ। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा के विश्राम सत्र एवं गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत की प्रगति, सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक जागरूकता को लेकर विस्तृत विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने तीव्र गति से विकास किया है और अगले दो-तीन वर्षों में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की क्षमता रखता है। उन्होंने लोगों से देश की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने वाली शक्तियों के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ ताकतें भारत की प्रगति, सनातन संस्कृति और परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समाज के भीतर भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से देश विरोधी गतिविधियों और षड्यंत्रों का समर्थन करते हैं।

उन्होंने रामायण के कालनेमि प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में भी ऐसे लोगों को पहचानना और उनसे सावधान रहना आवश्यक है, क्योंकि यदि समाज ऐसे तत्वों से अनभिज्ञ रहेगा तो स्वयं अपने हितों को नुकसान पहुंचाएगा।

उन्होंने कहा कि आज जब भारत वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है, तब कुछ शक्तियां देश में अस्थिरता, अशांति और अव्यवस्था फैलाने का प्रयास कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय देश के 120 जिलों में नक्सलवाद सक्रिय था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ऐसे में जो ताकतें पहले नक्सलवाद को बढ़ावा देती थीं, वे अब नए और छद्म रूपों में सामने आने का प्रयास कर सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के इतिहास में जब भी देश उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ा, तब चुनौतियां भी सामने आईं। उन्होंने रामायण, महाभारत और प्राचीन भारत के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को केवल उपलब्धियों पर संतुष्ट होकर नहीं बैठना चाहिए, बल्कि व्यवस्था को कमजोर करने वाली ताकतों के प्रति लगातार सजग रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा सभी मतों और सम्प्रदायों का सम्मान और संरक्षण करती है, लेकिन कुछ लोग इस सांस्कृतिक धारा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति, विशेष रूप से गुरु, शिक्षक और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी को सही दिशा दें और समाज को विभाजित करने वाली प्रवृत्तियों से बचाएं।

मुख्यमंत्री ने आधुनिक जीवनशैली और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को आवश्यकता से अधिक स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करना चाहिए। अभिभावकों को स्वयं भी मोबाइल का सीमित उपयोग कर बच्चों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सप्ताह में कम से कम एक दिन स्मार्टफोन का उपयोग पूरी तरह बंद करने का प्रयास किया जाए। उनके अनुसार, बच्चों द्वारा प्रतिदिन कई घंटे मोबाइल पर बिताने से उनकी आंखों, मानसिक क्षमता और सामाजिक व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व भारतीय गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल दीक्षा देने वाला व्यक्ति ही नहीं होता, बल्कि माता-पिता, बड़े भाई-बहन, शिक्षक और जीवन में मार्गदर्शन देने वाला प्रत्येक व्यक्ति गुरु की भूमिका निभाता है। समाज और राष्ट्र के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान भी इन्हीं मूल्यों से संभव है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा, योग और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, ताम्रपत्रों, सिक्कों और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में प्राचीन पांडुलिपियां और ऐतिहासिक सामग्री उपलब्ध है, जिनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सदियों से विविधताओं के बावजूद एक राष्ट्र रहा है। उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जातीयता, क्षेत्रीयता और विभाजनकारी सोच से ऊपर उठकर सभी नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत का अस्तित्व ही प्रत्येक नागरिक और समाज की शक्ति का आधार है तथा देश को आगे बढ़ाने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

कार्यक्रम में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह, सांसद रवि किशन शुक्ल, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित अनेक संत, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।