रिपोर्ट: विजय नागपाल।
मथुरा। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मथुरा जिला कारागार में भाई-बहन के प्रेम और भावनाओं का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर किसी को भावुक कर दिया। दूर-दराज के जिलों से अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने पहुंचीं बहनों की आंखें उस समय छलक उठीं, जब लंबी कतारों के बाद उन्हें अपने बंदी भाइयों से मिलने का अवसर मिला।
कारागार की ऊंची दीवारों के पीछे बंदियों की जिंदगी अक्सर उदासी, मायूसी, अपराधबोध और अपनों से मिलने की उम्मीद के बीच गुजरती है। ऐसे में रक्षाबंधन का पर्व उनके लिए भावनाओं से जुड़ा विशेष अवसर बन गया। बहनें घंटों इंतजार के बाद जब अपने भाइयों के सामने पहुंचीं तो मिलन की खुशी के साथ भावुकता का ज्वार उमड़ पड़ा।
जैसे ही बहनों ने बंदियों की भीड़ में अपने भाइयों को पहचाना, उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। कई बहनें अपने भाई को देखकर खुद को संभाल नहीं सकीं। उनके साथ आए छोटे बच्चे भी अपने मामा, भाई या अन्य परिजनों को देखकर भावुक हो गए और काफी देर तक सुबकते रहे। अपनों को रोता देखकर बंदी भाइयों की आंखें भी नम हो गईं।
मुलाकात के दौरान भाई-बहन कुछ देर तक एक-दूसरे को निहारते और दुलारते रहे। कभी मिलने की खुशी आंखों में आंसू बनकर छलकती तो कभी कुछ समय बाद फिर बिछड़ने का डर भावुक कर देता। इसी भावनात्मक माहौल के बीच बहनों ने अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधी और उन्हें जीवन में सही राह पर चलने तथा भविष्य में अपराध से दूर रहने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
कई बहनों ने अपने भाइयों से आग्रह किया कि जानबूझकर या भूलवश हुई गलतियों को पीछे छोड़कर वह अपराध की दुनिया से तौबा करें और जेल से बाहर निकलकर अपने परिवार के बीच नई जिंदगी की शुरुआत करें।

कुछ बहनों ने मुलाकात के दौरान माहौल को सामान्य बनाने के लिए भाइयों से हंसी-मजाक भी किया और चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास किया। लेकिन मुलाकात का समय पूरा होने के बाद जब वे कारागार से बाहर निकलीं तो भावनाएं फिर हावी हो गईं। बाहर आती कई बहनें सुबकती और आंसू पोंछती नजर आईं।
रक्षाबंधन पर जिला कारागार में देखने को मिला यह दृश्य इस बात का भावुक एहसास करा गया कि अपराध और सजा की दीवारों के बावजूद भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, अपनापन और उम्मीद की डोर आज भी उतनी ही मजबूत है।