सोमवती अमावस्या का आज पुण्य पर्व, नैमिषारण्य में गूंजें हर-हर महादेव के जयकारे।

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नैमिषारण्य (सीतापुर)। आज सोमवार को सोमवती अमावस्या का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इस अवसर पर नैमिषारण्य सहित विभिन्न तीर्थस्थलों, नदी घाटों और मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु पवित्र स्नान, दान-पुण्य, जप, तप और भगवान शिव-पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

आचार्य सदानंद द्विवेदी एवं आचार्य रमेश शास्त्री के अनुसार आज उदया तिथि में सोमवती अमावस्या का संयोग प्राप्त होने से पूरे दिन व्रत, स्नान, दान और पूजन का विशेष फल मिलेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्मों से चंद्रमा मजबूत होता है, पितृदोष का निवारण होता है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु पीपल को जल, दूध और काले तिल अर्पित कर उसकी परिक्रमा कर रहे हैं। मान्यता है कि पीपल में सभी देवी-देवताओं और पितरों का वास होता है। इस दिन पीपल की पूजा और प्रदक्षिणा करने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली प्राप्त होती है।

महिलाएं भी अपने पति और परिवार की मंगलकामना के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर रही हैं। शास्त्रों में इस व्रत को अखंड सौभाग्य और संतानों की दीर्घायु प्रदान करने वाला बताया गया है।

इस वर्ष सोमवती अमावस्या का महत्व इसलिए और बढ़ गया है क्योंकि आज ही सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही मिथुन संक्रांति का पर्व भी मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह दुर्लभ संयोग धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

नैमिषारण्य के चक्रतीर्थ, ललिता देवी मंदिर, हनुमानगढ़ी तथा अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजन, हवन और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

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