रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान स्वतंत्रता संग्राम की अमर प्रेरणा: विचार गोष्ठी में दी श्रद्धांजलि।

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मथुरा। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर अखिल भारतीय साम्प्रदायिकता विरोधी समिति की ओर से बल्देव आश्रम, डेम्पियर नगर स्थित कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने रानी लक्ष्मीबाई को देश की आजादी की लड़ाई और राष्ट्रीय एकता की अमर प्रेरणा बताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

गोष्ठी की अध्यक्षता कामरेड शिवदत्त चतुर्वेदी ने तथा संचालन एवं संयोजन वैद्य मनोज गौड़ ने किया। वक्ताओं ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के कारणों पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय जनता के संयुक्त प्रतिरोध का ऐतिहासिक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि उस संघर्ष में हिंदू और मुस्लिम समुदाय ने कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी।

वक्ताओं ने बहादुर शाह जफर, नाना साहेब, कुंवर सिंह, अजीमुल्ला खां, तात्या टोपे, बेगम हजरत महल और रानी लक्ष्मीबाई के अद्वितीय साहस एवं बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि यदि कुछ तत्कालीन राजाओं ने अंग्रेजों का साथ न दिया होता तो इतिहास का परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने कहा कि भारतीयों की एकता को तोड़ने के लिए अंग्रेजों ने ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई, जिसके दुष्परिणाम देश ने लंबे समय तक झेले।

गोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान समय में सांप्रदायिक राजनीति की आलोचना करते हुए देश की एकता, अखंडता और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया।

इस अवसर पर महासचिव सुशील सागर एडवोकेट, महेश चौबे, सुरेश शर्मा, लड्डू गोपाल एवं विजय कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के अंत में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भोपाल स्थित बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने के निर्णय की निंदा करते हुए इसे स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों का अपमान बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि बरकतुल्लाह खां काबुल में गठित पहली निर्वासित आजाद हिंद सरकार के प्रधानमंत्री थे, जबकि उसके राष्ट्रपति राजा महेंद्र प्रताप थे।

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  • Pawan Rastogi

    पवन कुमार रस्तोगी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में न्यूज़ पोर्टल में एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इन्होंने एम.ए., बीएड, पत्रकारिता तथा एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर क्षेत्र में एडीसीए तथा कला के क्षेत्र में बॉम्बे आर्ट जैसे पाठ्यक्रम भी पूर्ण किए हैं।
    समाचार लेखन, संपादन, जनसरोकार से जुड़े विषयों और डिजिटल पत्रकारिता में उनकी विशेष रुचि है। निष्पक्ष, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। वे सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षिक एवं जनहित से जुड़े मुद्दों को सरल, सटीक और विश्वसनीय ढंग से पाठकों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

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