•“केवल दंड बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं, पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित किया जाए”
जनमत/मथुरा। पेपर लीक की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सख्त दंडात्मक प्रावधानों पर प्रतिक्रिया देते हुए माता प्रसाद शर्मा ने कहा कि केवल सजा का प्रावधान बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उनका कहना है कि सरकार को दंड के साथ-साथ पेपर लीक की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी और व्यावहारिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भी पेपर लीक के मामलों में सजा का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके बावजूद विभिन्न परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आती रहीं। अब संशोधित विधेयक के माध्यम से सजा को 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष तक तथा अपराध की गंभीरता के अनुसार 50 लाख रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
माता प्रसाद शर्मा ने सवाल उठाया कि यदि प्रश्नपत्रों की छपाई, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, वितरण और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किए जाते, तो केवल दंड बढ़ाने का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेगा।
उन्होंने मांग की कि सरकार प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्र तक की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी व्यवस्था लागू करे, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।