खुले नाले फिर मांग रहे हैं जान, नगर निगम प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया!

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पांच साल बीत गए, पर सिस्टम नहीं बदला – हर बरसात के साथ खुलते हैं मौत के द्वार

मथुरा। समाजवादी पार्टी बाबा साहब अम्बेडकर वाहिनी के महानगर अध्यक्ष रमेश सैनी ने नगर निगम प्रशासन को चेताते हुए कहा कि बरसात का मौसम आते ही मथुरा नगर निगम के खुले नाले एक बार फिर मौत की दावत देने को तैयार खड़े हैं। यह कोई चेतावनी नहीं, बीते सालों का कड़वा सच है, जिसे प्रशासन ने बार-बार अनदेखा किया।

आज ही के दिन, पांच साल पहले सदर निवासी दो नौजवान जतिन और अरमान खुले नाले में गिरकर अपने परिवार से हमेशा के लिए बिछड़ गए थे। उस हादसे के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि मसानी रोड पर खुले नाले ने एक रिक्शा चालक की जान ले ली। और दर्द यहीं नहीं रुका। गोविंद नगर में एक सात साल के मासूम माधव की जान खुले नाले ने निगल ली। माधव चार बहनों के बीच अकेला भाई था। एक हादसा, और एक पूरा घर उजड़ गया।

समाजवादी पार्टी ने कई बार नगर निगम प्रशासन को चेताया नालों को ढकें, चेतावनी बोर्ड लगाएं, बैरिकेडिंग करें। लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। आज भी शहर भर में नाले मुंह बाए खड़े हैं, जैसे किसी और जिंदगी का इंतजार कर रहे हों।

नगर आयुक्त ने स्वच्छता निरीक्षकों को सर्वे के निर्देश तो दिए हैं, और अखबारों में छपा है कि “नालों के संभावित दुर्घटनास्थल चिह्नित होंगे”। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा, जैसे हर बार होता आया है?

समाजवादी पार्टी बाबा साहब अम्बेडकर वाहिनी के महानगर अध्यक्ष रमेश सैनी ने कहा कि अगर शीघ्र ही नालों को नहीं ढका गया, बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए, तो नगर निगम कार्यालय का घेराव किया जाएगा। साथ ही कहा जतिन, अरमान, रिक्शा चालक और मासूम माधव की मौतें प्रशासन की लापरवाही का सबूत हैं। अब और किसी मां की गोद उजड़ने से पहले प्रशासन को जागना होगा।

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